उत्तराखंड में अब शादी या लिव-इन संबंधों में झूठी पहचान देने वालों के लिए कड़े कानून लागू हो गए हैं। राज्य में समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड (संशोधन) अध्यादेश, 2026 अब लागू हो चुका है।
राज्य सरकार ने इस कानून के जरिए विवाह, पंजीकरण और लिव-इन संबंधों को लेकर नियमों को और प्रभावी बनाने का बड़ा कदम उठाया है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने संशोधन को मंजूरी दी है।
शादी में झूठी पहचान देने पर कार्रवाई
अध्यादेश के तहत यदि किसी पक्षकार ने अपनी पहचान या वैवाहिक स्थिति छिपाई, तो यह शादी को अमान्य बनाने का आधार बनेगा। ऐसे मामलों में अब भारतीय दंड संहिता के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
लिव-इन संबंधों पर कड़े प्रावधान
लिव-इन संबंधों के लिए भी नए नियम बनाए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति बल, दबाव या धोखाधड़ी से लिव-इन संबंध स्थापित करता है, तो उसे सात साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।
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खून के रिश्तों या निषिद्ध श्रेणियों में लिव-इन रहने पर भी सात साल की सजा है।
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किसी वयस्क द्वारा नाबालिग के साथ लिव-इन में रहने पर छह महीने की जेल और 50,000 रुपये जुर्माना लगाया जा सकेगा।
लिव-इन संबंध समाप्त होने पर निबंधक दोनों पक्षों को प्रमाण पत्र जारी करेंगे। वहीं, विवाह, तलाक या लिव-इन पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति भी महानिबंधक के पास होगी। हालांकि, किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित पक्ष को पूरा सुनवाई का अवसर दिया जाएगा।