सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने COEMPT Edutech को दिए गए अनुबंध पर लगाए जा रहे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। बोर्ड का कहना है कि इस मामले में फैलाई जा रही जानकारियां गलत, भ्रामक और तथ्यों से परे हैं।
सीबीएसई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि एजेंसी का चयन पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया और वित्तीय नियमों के तहत किया गया है। बोर्ड के अनुसार, 2026 की बोर्ड परीक्षाओं की डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया के लिए 28 अगस्त 2025 को सरकारी ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर टेंडर जारी किया गया था, जिसके बाद योग्य बोलीदाता को नियमों के अनुसार अनुबंध दिया गया।
राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज
इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान तब और बढ़ गया जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सीबीएसई की OSM प्रणाली और COEMPT Edutech को दिए गए ठेके पर सवाल खड़े किए। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए इस पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच या SIT जांच की मांग की।
राहुल गांधी ने दावा किया कि COEMPT Edutech पहले “Globarena” नाम से काम करती थी और इससे पहले तेलंगाना में 2019 और 2023 की परीक्षाओं से जुड़े मामलों में इसका नाम सामने आ चुका है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में कथित गड़बड़ियों के कारण तेलंगाना में कई छात्रों के आत्महत्या के मामले सामने आए थे।
उन्होंने सवाल उठाया कि विवादित इतिहास के बावजूद इस कंपनी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी क्यों दी गई और चयन प्रक्रिया में कौन-कौन से नियमों की अनदेखी की गई।
कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस ने इस मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने से बच रही है।
विवाद तब और गहरा गया जब कुछ कक्षा 12 के छात्रों ने अपने परीक्षा परिणामों को लेकर अनियमितताओं की शिकायत की। छात्रों का कहना है कि उन्हें जो उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी उपलब्ध कराई गई, वह उनकी वास्तविक लिखावट से मेल नहीं खा रही थी।
हालांकि सीबीएसई के सूत्रों ने इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि सभी शिकायतों की जांच प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।