बिहार में अब लिखित परीक्षा के आधार पर होगी सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति

पटना: राज्य के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों (असिस्टेंट प्रोफेसर) की नियुक्ति प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। अब इस पद के लिए चयन 160 अंकों की लिखित परीक्षा और 40 अंकों के साक्षात्कार के आधार पर होगा।
इस संबंध में नया कानून का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। राज्यपाल और विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के आदेश के तहत यह ड्राफ्ट बनाया गया और इसके लिए बिहार लोक भवन सचिवालय ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से सुझाव मांगे हैं। कुलपतियों को दिशा-निर्देश जारी कर 11 मार्च तक अपनी प्रतिक्रिया देने को कहा गया है।
राज्य सरकार से भी ड्राफ्ट पर सुझाव मांगा गया है। यदि तय समय तक कोई सुझाव नहीं आता है, तो इसे माना जाएगा कि संबंधित संस्थान ड्राफ्ट से सहमत हैं। यह नया प्रावधान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों के अनुरूप तैयार किया गया है।
चयन प्रक्रिया और परीक्षा के नियम
ड्राफ्ट के अनुसार, सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग द्वारा की जाएगी। लिखित परीक्षा में योग्य अभ्यर्थियों को ही साक्षात्कार में बुलाया जाएगा। साक्षात्कार में कम से कम तीन प्रोफेसर-कोटि के विषय विशेषज्ञ शामिल होंगे।
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लिखित परीक्षा की अवधि तीन घंटे होगी।
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अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और दिव्यांग अभ्यर्थियों को 5 अंकों की छूट दी जाएगी।
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अन्य सभी उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम उत्तीर्णांक 50 प्रतिशत होगा।
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परीक्षा का पाठ्यक्रम राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) के अनुरूप होगा। NET उत्तीर्ण या इसके समकक्ष परीक्षा पास अभ्यर्थी इसमें शामिल होंगे।
आयुसीमा और आरक्षण नीति
नए नियमों के अनुसार:
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सहायक प्राध्यापक बनने के लिए न्यूनतम आयु 23 वर्ष है।
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अधिकतम आयु 45 वर्ष होगी (विज्ञापन वर्ष के 1 अगस्त तक)।
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विज्ञापन की तिथि पर राज्य सरकार की आरक्षण नीति का पालन अनिवार्य होगा।
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नियुक्तियां अखिल भारतीय खुले विज्ञापन के आधार पर की जाएंगी।
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रिक्त पदों की सूची विश्वविद्यालयों द्वारा उच्च शिक्षा विभाग के माध्यम से बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग को भेजी जाएगी।
ड्राफ्ट में और भी कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं, जिन्हें राज्यपाल और कुलाधिपति द्वारा गठित कमेटी ने तैयार किया है।
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