अंग प्रत्यारोपण के बाद भी जीत का जज्बा, बलवीर सिंह ने जर्मनी में जीता कांस्य पदक

बाराबंकी के खिलाड़ी बलवीर सिंह ने जर्मनी में आयोजित वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स में बैडमिंटन प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतकर भारत का प्रतिनिधित्व किया। अंग प्रत्यारोपण के बाद भी खेल की दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाले बलवीर यह साबित कर चुके हैं कि जज्बे से कोई भी कठिनाई इंसान को रोक नहीं सकती। यह उनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पांचवीं उपलब्धि है। देश के लिए खेलते हुए उन्होंने पहले दो बार स्वर्ण पदक भी जीते हैं।
रविवार को अमर उजाला कार्यालय में बलवीर ने अपनी संघर्षगाथा साझा की। उन्होंने बताया कि 2009 में दोनों किडनियों की खराबी के चलते उनका जीवन थम सा गया था। 45 बार डायलिसिस के बाद 2011 में उन्हें किसी अज्ञात दाता का जीवन-तोहफा मिला। उन्होंने ठाना कि अब जिंदगी को कभी हार नहीं मानने देंगे और खेल को अपनी ताकत बनाएंगे।
बलवीर ने कहा, "डायलिसिस के बाद कई बार मैं टूट जाता था, लेकिन मेरी पत्नी ममता सिंह और परिवार ने हमेशा हौसला बढ़ाया। हर पदक मेरा नहीं, यह परिवार का है। अंगदान करने वाले असली हीरो हैं। मेरी जीत मानवता की जीत है।"
जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने उनकी उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि बलवीर सिंह की सफलता पूरे जिले के लिए गर्व की बात है। उन्हें उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान दिलाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा रहा है और उनके प्रमोशन पर भी विचार किया जाएगा।
बलवीर सिंह की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां:
- 2015, अर्जेंटीना: स्वर्ण और कांस्य पदक
- 2017, स्पेन: बैडमिंटन एकल में स्वर्ण
- 2019, यूके: रजत पदक
- 2023, ऑस्ट्रेलिया: शानदार प्रदर्शन
- 2025, जर्मनी: हंगरी और ग्रेट ब्रिटेन के खिलाड़ियों को हराकर कांस्य
बलवीर की कहानी यह संदेश देती है कि जज्बा, परिवार का साथ और मानवता की प्रेरणा मिलकर जीवन में असाधारण उपलब्धियां दिला सकते हैं।
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