बजट 2026: मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा, रांची और तेजपुर में NIMHANS-2 की स्थापना

केंद्रीय बजट 2026-27 के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बताया कि उत्तर भारत में मानसिक स्वास्थ्य के लिए कोई समर्पित संस्थान नहीं है, इसलिए सरकार ने NIMHANS-2 की स्थापना का निर्णय लिया है। इसके लिए रांची और तेजपुर को चुना गया है, ताकि मानसिक रोगों के इलाज और शोध को नई दिशा मिल सके।
रांची: पहले से ही मानसिक स्वास्थ्य का केंद्र
झारखंड की राजधानी रांची में पहले से ही दो प्रमुख मानसिक स्वास्थ्य संस्थान हैं – सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री (CIP) और रांची इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो-साइकेट्री एंड एलाइड साइंसेज (RINPAS)। ये दोनों संस्थान कांके क्षेत्र में स्थित हैं और पूरे देश में अपनी सेवाओं के लिए जाने जाते हैं।
CIP: सदी पुराना संस्थान
CIP की स्थापना 17 मई 1918 को हुई थी, जिसे पहले रांची यूरोपियन ल्यूनेटिक असाइलम कहा जाता था। 211 एकड़ में फैले इस संस्थान में मनोरोग, नैदानिक मनोविज्ञान और सामाजिक कार्य में स्नातकोत्तर प्रशिक्षण और शोध कार्य होता है। 643 बिस्तरों वाला यह ओपन हॉस्पिटल है, जहां मरीजों को बंद कमरों में नहीं रखा जाता। 24 घंटे आपातकालीन सेवा, ओपीडी और टेलीफोनिक हेल्पलाइन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
RINPAS: ऐतिहासिक भूमिका
RINPAS की शुरुआत 1795 में मुंगेर मानसिक अस्पताल के रूप में हुई थी और 1925 में इसे रांची स्थानांतरित किया गया। इसे भारतीय मरीजों के लिए ब्रिटिश शासन द्वारा स्थापित पहला मानसिक अस्पताल माना जाता है। संस्थान मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास, सामुदायिक आउटरीच और शिक्षा पर विशेष ध्यान देता है।
गरीबों के लिए सहारा
CIP कांके गरीब और वंचित मरीजों के लिए इलाज का सबसे बड़ा केंद्र है। दो महीने के उपचार के लिए मात्र ₹600 का शुल्क लिया जाता है, जिसमें रहने, खाने, कपड़े और दवाइयां शामिल हैं। डॉक्टर की फीस सिर्फ ₹10 है।
देशभर से मरीज आते हैं
CIP रांची में झारखंड के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों से मरीज इलाज के लिए आते हैं। यहां दवा उपचार के साथ साइकोथेरेपी, योग और खेलकूद जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
NIMHANS-2 से नई उम्मीद
NIMHANS-2 के साथ उत्तर भारत में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा, शोध और उपचार में नई दिशा मिलेगी और मरीजों को बेहतर सुविधा मिलेगी। यह कदम देशभर में मानसिक स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
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