दो साल के संघर्ष के बाद सूडान में आरएसएफ-एसएएफ के बीच युद्धविराम की उम्मीदें

सूडान में दो साल से जारी खूनी संघर्ष के बीच शांति की दिशा में पहल दिख रही है। देश की अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्स (आरएसएफ) ने अमेरिका के प्रस्तावित मानवीय युद्धविराम को स्वीकार करने की तैयारी जताई है। यह प्रस्ताव अमेरिका, सऊदी अरब, मिस्र और यूएई के नेतृत्व वाले 'क्वाड' समूह की ओर से आया है। इसका उद्देश्य युद्ध से प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और बिगड़ते मानवीय हालात को सुधारना है। फिलहाल सूडान की नियमित सेना (एसएएफ) की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
समझौते के बिंदुओं पर बातचीत जारी
अमेरिका के अरब और अफ्रीकी मामलों के वरिष्ठ सलाहकार मसाद बुलोस ने इस हफ्ते बताया कि दोनों पक्षों ने युद्धविराम के सिद्धांत में सहमति दे दी है। उन्होंने कहा, "अब हम समझौते के अहम बिंदुओं पर काम कर रहे हैं और किसी भी पक्ष ने शुरू में आपत्ति नहीं जताई।"
सेना प्रमुख का कड़ा बयान
इसी बीच, सेना प्रमुख अब्देल फतह अल-बुरहान ने अपने संबोधन में कहा कि उनकी सेना युद्ध के माध्यम से दुश्मनों को हराने के लिए लड़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि वे उन इलाकों में कार्रवाई करेंगे जहां विद्रोहियों ने हमले किए और नागरिकों पर अत्याचार किया।
आरएसएफ पर अल-फाशर में जनसंहार के आरोप
युद्धविराम की तैयारी के समय आरएसएफ पर उत्तरी दारफुर के अल-फाशर में जनसंहार के गंभीर आरोप लगे हैं। 26 अक्टूबर को शहर पर कब्जा करने से पहले आरएसएफ ने करीब 18 महीने तक इसे घेराबंदी में रखा था। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, कब्जे के बाद 70,000 से अधिक लोग पलायन कर चुके हैं। मानवाधिकार संगठनों और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इस दौरान शहर में सामूहिक हत्याएं, दुष्कर्म और अन्य अत्याचार हुए।
युद्ध अपराधों की जांच
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने सितंबर में जारी रिपोर्ट में आरएसएफ और एसएएफ दोनों को युद्ध अपराधों का दोषी ठहराया। रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों पक्षों ने नागरिकों पर हमले, हत्या और यौन हिंसा जैसी गंभीर घटनाओं को अंजाम दिया। वर्तमान में आरएसएफ पश्चिमी दारफुर और दक्षिणी क्षेत्रों पर नियंत्रण रखता है, जबकि सेना उत्तर, पूर्व और नील नदी व लाल सागर के आसपास मजबूत स्थिति में है।
इस घटनाक्रम से सूडान में लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन दोनों पक्षों के युद्ध अपराधों और मानवीय संकट को देखते हुए भविष्य की राह अभी अस्थिर बनी हुई है।
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