मोहब्बत का इज़हार हिंसा से नहीं किया जा सकता: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी

नई दिल्ली, 25 सितंबर: 'आई लव मोहम्मद' लिखने को लेकर विवाद बढ़ने के बीच ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने स्पष्ट किया कि पैगंबर-ए-इस्लाम के प्रति मोहब्बत का इज़हार हिंसा, धरना-प्रदर्शन या सड़कों पर टकराव करके नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि ऐसा करना पैगंबर की शिक्षाओं के खिलाफ है।
मौलाना रजवी ने कहा कि एक अच्छा मुसलमान वही है जिसके हाथ, पांव और जुबान से किसी को तकलीफ न पहुंचे। उन्होंने यह भी बताया कि पैगंबर साहब ने अपनी हदीस में कहा है कि नमाज पढ़ना उनकी आंखों की ठंडक है। इसलिए मुसलमानों को पांच वक्त की नमाज़ अदा करनी चाहिए, न कि बैनर और होर्डिंग्स लगाने या जुलूस निकालने में अपना समय व्यर्थ करना चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि पैगंबर मोहम्मद केवल मुसलमानों के लिए नहीं बल्कि पूरे इंसानियत के लिए रहमत हैं। मोहब्बत और शिक्षा का असली मतलब यही है कि इंसान झूठ, धोखा, नाजायज़ काम, नशा, शराब, जुआ और अन्य बुराइयों से दूर रहे।
मौलाना रजवी ने कहा कि पैगंबर साहब ने हमेशा समझौते और शांति का मार्ग अपनाया, और विरोधियों से कभी टकराव नहीं किया। उन्होंने 'सुलह ए हुदैबिया' का उदाहरण देते हुए बताया कि इसे पढ़ना और समझना हर मुसलमान के लिए जरूरी है।
मौलाना ने सलाह दी कि पैगंबर साहब के प्रति मोहब्बत का असली इज़हार मस्जिदों और मदरसों में उनकी सीरत पर अमल करके और अपने परिवार व समाज की जिंदगी को उनके बताए मार्ग पर चलाकर किया जा सकता है। किसी भी हाल में कानून को अपने हाथ में लेना या टकराव का रास्ता अपनाना अनुचित है।
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