‘देश मुश्किलें झेल लेगा, लेकिन PM की सुरक्षा से समझौता नहीं’, छात्र का मोदी को पत्र

कानपुर: हाल के दिनों में वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, विशेषकर ईरान-इजरायल संघर्ष और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच कानपुर के एक छात्र का पत्र चर्चा का विषय बना हुआ है। छात्र आशुतोष यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित एक भावनात्मक पत्र लिखकर उनके नेतृत्व और सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता तथा विश्वास व्यक्त किया है।
प्रधानमंत्री की सुरक्षा को बताया राष्ट्रीय प्राथमिकता
आशुतोष यादव ने अपने पत्र में लिखा कि देश के लिए प्रधानमंत्री की सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि नागरिक आर्थिक कठिनाइयों और अन्य चुनौतियों का सामना कर सकते हैं, लेकिन देश के सर्वोच्च नेतृत्व की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री को देशवासियों की उम्मीदों और विश्वास का केंद्र बताया।
सुरक्षा खर्च में कटौती की खबरों पर जताई चिंता
पत्र लिखने की प्रेरणा उस समय मिली, जब कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था पर होने वाले खर्च में कटौती की संभावनाओं का जिक्र किया गया। छात्र ने प्रधानमंत्री की सादगी और मितव्ययिता की सराहना करते हुए कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में उनकी सुरक्षा किसी भी अन्य मुद्दे से अधिक महत्वपूर्ण है।
आत्मनिर्भरता और राष्ट्रहित का किया समर्थन
अपने पत्र में आशुतोष ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों, ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ी समस्याओं का उल्लेख करते हुए ‘आत्मनिर्भर भारत’ की अवधारणा का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि उनका परिवार भी देशहित में आवश्यक त्याग करने को तैयार है और गैर-जरूरी आयातित वस्तुओं पर निर्भरता कम करने का संकल्प ले चुका है।
देश के सम्मान के लिए हर त्याग को तैयार
छात्र ने पत्र में भावनात्मक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए लिखा कि यदि जरूरत पड़ी तो उनका परिवार कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए भी तैयार है, लेकिन देश की प्रतिष्ठा, पहचान और संप्रभुता को किसी भी कीमत पर प्रभावित नहीं होने देगा।
परिवार ने भी भेजीं शुभकामनाएं
आशुतोष ने पत्र में अपनी दादी इंद्रानी देवी, पिता श्याम सिंह और माता सुधा यादव की ओर से भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए शुभकामनाएं और आशीर्वाद व्यक्त किए। उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान प्रधानमंत्री के नेतृत्व की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को हासिल करेगा।
यह पत्र सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है और इसे एक आम नागरिक द्वारा प्रधानमंत्री और राष्ट्र के प्रति व्यक्त किए गए विश्वास और भावनाओं के रूप में देखा जा रहा है।
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