सारंडा में माओवादियों का अंतिम किला ध्वस्त करने की तैयारी, 45 नक्सली घिरे

रांची। झारखंड के सारंडा जंगल में माओवादियों के खिलाफ सुरक्षा बलों का अभियान लगातार जारी है। आपरेशन मेगाबुरू के तहत 17 माओवादी पहले ही ढेर किए जा चुके हैं और अब बचे हुए आतंकियों की तलाश में जवान हर दिन आगे बढ़ रहे हैं। ओडिशा और झारखंड की सीमा से सुरक्षा बलों का घेरा लगातार मजबूत किया जा रहा है।
सुरक्षा बलों ने माओवादी ठिकानों की घेराबंदी की
झारखंड जगुआर (एसटीएफ), कोबरा, सीआरपीएफ और जिला बलों की टीमें माओवादियों की ठिकानों पर घेराबंदी बनाए हुए हैं। राज्य पुलिस और केंद्रीय बलों ने दस अस्थाई कैंपों से माओवादियों को चारों तरफ से घेर लिया है। माओवादियों के आने-जाने के सभी मार्ग सील कर दिए गए हैं और वहां भारी सुरक्षा बल तैनात हैं।
माओवादी बौखलाहट में, दो ही विकल्प
सुरक्षा बलों के अनुसार, माओवादियों के पास अब केवल दो विकल्प हैं: आत्मसमर्पण या सुरक्षा बलों के साथ आमना-सामना। रसद के मार्ग बंद होने और घेराबंदी के चलते माओवादी दबाव में हैं।
ड्रोन से निगरानी
अभियान में ड्रोन का भी उपयोग किया जा रहा है। सुरक्षा बलों ने दावा किया है कि वे हार्डकोर माओवादी मिसिर बेसरा और असीम मंडल समेत कुल 45 माओवादियों की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। अभियान के सफल समापन के बाद झारखंड से माओवादियों के खात्मे की घोषणा की जाएगी।
माओवादियों की भाषा में जवाब दे रहे जवान
सुरक्षा बल अभियान के दौरान माओवादियों की भाषा और रणनीति का इस्तेमाल कर उनके खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। रात के अंधेरे में अस्थाई कैंप की घेराबंदी और चौकसी माओवादियों की तरह की जा रही है। जवान संतरी तैनात कर, वायरलेस और वाकी-टॉकी से संपर्क बनाए रख रहे हैं।
सीआइडी करेगी आपरेशन मेगाबुरू की जांच
पश्चिमी सिंहभूम जिले के छोटानागरा थाना क्षेत्र में आपरेशन मेगाबुरू में मारे गए 17 माओवादियों से जुड़े मामले की जांच जल्द ही सीआइडी करेगी। प्राथमिकी का टेकओवर कर सीआइडी जांच अधिकारी मामले की पूरी जांच करेंगे। यह कानूनी प्रक्रिया है, जिसके तहत जहां भी पुलिस कार्रवाई में किसी की मौत होती है, उसकी जांच सीआइडी करती है।
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