पंजाब-राजस्थान जल विवाद: पुराने समझौते का बकाया भुगतान बना नया मुद्दा

चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि वर्ष 1920 में राजस्थान के साथ जल समझौता हुआ था। उन्होंने कहा कि 1960 तक राजस्थान हर साल 18,000 क्यूसेक पानी के लिए भुगतान करता रहा, लेकिन 1960 के बाद नया जल समझौता होने के बाद राजस्थान की ओर से यह भुगतान बंद हो गया। अब पंजाब सरकार ने राजस्थान को पत्र लिखकर अपना पुराना बकाया राशि मांगने की प्रक्रिया शुरू की है।
नहरों और जल स्रोतों से किसानों को लाभ
मुख्यमंत्री मान और सिंचाई मंत्री बरिंदर गोयल ने बताया कि पिछले चार वर्षों में नहरी पानी से पंजाब में करीब 70 लाख एकड़ जमीन सिंचित की गई है। इसके साथ ही ऐसे जल स्रोतों को फिर से सक्रिय किया जा रहा है, जो पहले दबे हुए थे। नहरों और फीडरों की क्षमता बढ़ाकर किसानों तक नहरी पानी पहुँचाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने इस अवधि में जल स्रोतों के जरिए किसानों को फायदा पहुंचाने वाली योजनाओं की समीक्षा भी की। साथ ही सिंचाई और खनन विभाग के अधिकारियों के साथ भविष्य में लागू की जाने वाली नई योजनाओं पर चर्चा की।
भूजल स्तर में सुधार का दावा
मुख्यमंत्री मान ने दावा किया कि नहरी पानी की बेहतर आपूर्ति और ट्यूबवेलों पर कम दबाव के कारण पंजाब का भूजल स्तर 0 से 4 मीटर ऊपर आया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में सिंचाई के लिए नहरों का नेटवर्क और विस्तार किया जाएगा, ताकि किसानों को अधिक से अधिक लाभ पहुँच सके।
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