लखीमपुर खीरी में शारदा नदी का कटान जारी, दर्जनों घर और खेत नष्ट

लखीमपुर खीरी के निघासन क्षेत्र के ग्रंट 12 गांव में शारदा नदी का कटान थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार सुबह तक तेज धार ने पांच पक्के मकान एक झटके में बहा दिए। इसमें दीपक कुमार, राजवती, श्रीमोहन, सोनू कुमार और रामखेलावन के मकान शामिल हैं। कटान के दौरान नदी में समाते मकानों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। रविवार को भी निर्मला, धीरज, सुमित्रा देवी, विपिन कुमार और राधेश्याम के घर बह गए थे।
ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि अब तक 122 घर कटान की भेंट चढ़ चुके हैं। सैकड़ों बीघा उपजाऊ जमीन और कई मवेशी भी नदी में बह गए। रोजाना कई परिवार बेघर हो रहे हैं और लोग खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं। पीड़ितों का आरोप है कि प्रशासन केवल मुआवजा बांटकर औपचारिकता पूरी कर रहा है।
तहसीलदार मुकेश वर्मा ने बताया कि जलस्तर कम होने के बावजूद कटान तेज हो गया है। प्रशासन पीड़ितों को सुरक्षित स्थान पर बसाने के प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा, “जब तक स्थायी पुनर्वास नहीं होगा, वास्तविक राहत नहीं मिलेगी।”
सिंघिया गांव पर संकट
विकास खंड बिजुआ क्षेत्र का सिंघिया गांव भी कटान की चपेट में है। 2024 में यहां 119 घर थे, पिछले साल 25 घर कटान में बह गए। इस साल सितंबर में शुरू हुए कटान में अब तक 41 और घर नष्ट हो चुके हैं। 21 सितंबर को एक ही दिन में 11 मकान, सड़क और कई बिजली के खंभे बह गए। प्रभावित परिवारों में रामनरायन, दारासिंह, लल्लन, महेश कुमार, प्रमोद कुमार, भृगुनाथ, रामप्रवेश, नीरज कुमार, गौरीशंकर, गनेश और हरेराम शामिल हैं।
बेघर हुए परिवार सड़क किनारे तिरपाल डालकर बच्चों और मवेशियों के साथ रहने को मजबूर हैं। पीने के पानी, दूध और दवाओं की कमी हो रही है, वहीं मवेशियों के लिए चारे का इंतजाम करना भी चुनौती बन गया है। क्षेत्रीय लेखपाल राकेश शुक्ल लगातार स्थिति पर नजर रख रहे हैं और तहसील प्रशासन को जानकारी दे रहे हैं।
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