शशि थरूर हैं सच्चे देशभक्त, राहुल गांधी को उनसे सीख लेनी चाहिए: केंद्रीय मंत्री संजय सेठ

रांची: ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच देश में गैस आपूर्ति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। इसी बीच भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर की खुलकर तारीफ की है।
संजय सेठ ने कहा कि हर मुद्दे पर विरोध करना उचित नहीं होता। उन्होंने कहा कि शशि थरूर भले ही कांग्रेस के सांसद हैं, लेकिन जब भी देश के हित की बात आई है, उन्होंने जिम्मेदार रुख अपनाया है। सेठ ने उन्हें सच्चा देशभक्त बताते हुए कहा कि कांग्रेस के अन्य नेताओं, खासकर राहुल गांधी को उनसे सीख लेनी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक नीति की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार की संतुलित विदेश नीति के कारण देश में कहीं भी डीजल, पेट्रोल या गैस की कमी जैसी स्थिति नहीं बनी है और आम लोगों में किसी तरह की घबराहट भी नहीं है।
संजय सेठ ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने अनावश्यक रूप से भय और भ्रम का माहौल बनाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अक्सर देश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सवाल उठाती रही है, चाहे वह ऑपरेशन सिंदूर हो, अर्थव्यवस्था का मामला हो या फिर सर्जिकल स्ट्राइक।
उन्होंने आगे कहा कि शशि थरूर ने एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और नागरिक के रूप में अपनी सोच को सामने रखा है, जिसके लिए वे उनके आभारी हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को भी थरूर के दृष्टिकोण से सीख लेनी चाहिए।
थरूर ने क्या कहा था?
दरअसल, शशि थरूर ने हाल ही में एक लेख में भारत की कूटनीतिक चुप्पी को जिम्मेदार विदेश नीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि इसे नैतिक आत्मसमर्पण के रूप में देखना गलत है, जैसा कि कुछ लोगों द्वारा दावा किया जा रहा है।
विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष थरूर ने अपने लेख में भारत की पारंपरिक विदेश नीति का जिक्र करते हुए पंडित जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्षता की नीति को याद किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत का रुख किसी एक शक्तिशाली गुट की ओर झुकाव नहीं है।
थरूर ने लिखा कि भारत की विदेश नीति हमेशा सिद्धांत और व्यावहारिकता के बीच संतुलन बनाने पर आधारित रही है। उनके अनुसार, नेहरू की गुटनिरपेक्ष नीति का उद्देश्य नैतिकता से दूरी बनाना नहीं था, बल्कि शीत युद्ध जैसी वैश्विक प्रतिस्पर्धाओं से भारत की संप्रभुता और हितों को सुरक्षित रखना था।
उन्होंने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज दुनिया तेजी से बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है और भारत ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ की नीति पर काम कर रहा है। थरूर के मुताबिक, ईरान के खिलाफ युद्ध अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उचित नहीं है, लेकिन भारत की चुप्पी उस युद्ध का समर्थन नहीं बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए अपनाई गई सावधानीपूर्ण कूटनीति है।
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