होर्मुज में ईरान के टैक्स लेने पर भड़के ट्रंप, बोले- यह वह समझौता नहीं, जो हमने किया

HIGHLIGHTS
- अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल परिवहन को लेकर ईरान की भूमिका पर गंभीर चिंता जताई है।
- उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से तेल की निर्बाध आवाजाही में बाधा डालकर ईरान “अच्छा काम नहीं कर रहा” है और इसे कई लोग अनुचित भी मान सकते हैं।
- ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट से तेल आवागमन को प्रभावित करना उस समझौते की भावना के विपरीत है, जिसकी अपेक्षा की गई थी।
- उनके अनुसार यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति के लिए सही संकेत नहीं है।
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल परिवहन को लेकर ईरान की भूमिका पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से तेल की निर्बाध आवाजाही में बाधा डालकर ईरान “अच्छा काम नहीं कर रहा” है और इसे कई लोग अनुचित भी मान सकते हैं।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट से तेल आवागमन को प्रभावित करना उस समझौते की भावना के विपरीत है, जिसकी अपेक्षा की गई थी। उनके अनुसार यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति के लिए सही संकेत नहीं है।
रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि ईरान कुछ तेल टैंकरों से शुल्क वसूल सकता है। इसी को लेकर ट्रंप ने पहले भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि यदि ऐसी गतिविधियाँ हो रही हैं तो इन्हें तुरंत रोका जाना चाहिए।
इस मामले पर White House का कहना है कि वह युद्धविराम समझौते के तहत इस रणनीतिक जलमार्ग को फिर से पूरी तरह खोलने के पक्ष में है। साथ ही व्हाइट हाउस का यह भी कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप उन सैन्य गतिविधियों का विरोध करते हैं, जिनके जरिए ईरान इस मार्ग पर नियंत्रण बनाए हुए है या जहाजों से राजस्व जुटाने की कोशिश कर रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है। ईरान और अमेरिका दोनों ही हालिया युद्धविराम को अपनी-अपनी सफलता के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं और एक-दूसरे पर दबाव बढ़ाते दिख रहे हैं।
ईरान की अर्धसरकारी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में कुछ क्षेत्रों में बारूदी सुरंगें बिछाई हैं, जिससे तेल परिवहन प्रभावित हुआ है। यह वही समुद्री मार्ग है जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है।
स्थिति को लेकर यह सवाल भी उठ रहे हैं कि ईरान के यूरेनियम भंडार का भविष्य क्या होगा, इस मार्ग से सामान्य व्यापार कब बहाल होगा, और क्या क्षेत्र में मिसाइल हमलों तथा प्रॉक्सी समूहों के समर्थन को लेकर ईरान की रणनीति में कोई बदलाव आएगा।
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