वृंदावन में तेज आंधी बनी आफत, जर्जर छज्जा गिरने से 9 श्रद्धालु घायल

वृंदावन। मंगलवार शाम वृंदावन में अचानक आई तेज आंधी और बारिश के दौरान हुए अलग-अलग हादसों में कई श्रद्धालु घायल हो गए। मौसम विभाग का अलर्ट मोबाइल पर पहुंचते ही जहां लोग सतर्क हो रहे थे, वहीं कुछ ही देर बाद तेज हवाओं ने हालात बिगाड़ दिए और हादसों की एक श्रृंखला शुरू हो गई।
तेज आंधी में सड़क पर गिरे श्रद्धालु, सिर में गंभीर चोट
अलीगढ़ के लक्ष्मीनारायण अपने परिवार के साथ जन्मदिन मनाने वृंदावन आए थे। वे पत्नी और दो बेटियों के साथ बांकेबिहारी मंदिर में दर्शन के बाद परिचित मनीष गोस्वामी के घर रुके हुए थे। इसी दौरान अचानक तेज आंधी शुरू हो गई।
जानकारी के अनुसार, तेज आवाज और हवा के झोंके के बीच लक्ष्मीनारायण बाहर निकले, तभी अचानक एक हादसा हो गया। परिजनों ने देखा तो वह सड़क पर बेहोश पड़े थे और उनके सिर से खून बह रहा था।
परिजन तुरंत उन्हें उठाकर अस्पताल की ओर भागे। इस दौरान एंबुलेंस मौके पर पहुंची और घायल को अस्पताल भेजा गया। परिवार का कहना है कि किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि कुछ ही मिनटों में इतना बड़ा हादसा हो जाएगा।
पिता-बेटा दोनों घायल, मासूम से चिपककर रो पड़ा पिता
आगरा के रुनकता निवासी विजय और उनका पांच वर्षीय बेटा रुद्रांश भी हादसे की चपेट में आ गए। तेज हवा के दौरान रुद्रांश के सिर में चोट लग गई।
हादसे के बाद पिता ने खुद की चोट की परवाह किए बिना पहले बच्चे को संभाला और कपड़े से उसके सिर पर पट्टी बांधी। बच्चा दर्द से रो रहा था, जबकि पिता की आंखों से आंसू निकल रहे थे।
दोनों को अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद परिजन उन्हें आगरा ले गए। इलाज के दौरान बेटा लगातार पिता से चिपका रहा।
राजस्थान से आई मां-बेटी भी घायल
राजस्थान के सवाई माधोपुर से चंचल प्रजापति अपनी मां जानकी देवी और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ वृंदावन दर्शन के लिए आई थीं। परिक्रमा के बाद ठाकुरजी के दर्शन के दौरान वे हादसे का शिकार हो गईं।
हादसे में मां और बेटी दोनों घायल हुई हैं, हालांकि डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत खतरे से बाहर है।
जर्जर इमारतें और संकरी गलियां बनी बड़ी चुनौती
वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर क्षेत्र की संकरी गलियां और पुराने भवन लगातार चिंता का कारण बने हुए हैं। भीड़भाड़ और जर्जर निर्माणों के कारण किसी भी छोटे हादसे का बड़ा असर देखने को मिलता है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई इमारतों की बालकनी और छज्जे जर्जर हालत में हैं, लेकिन कार्रवाई अक्सर नोटिस तक ही सीमित रह जाती है। बारिश और आंधी के मौसम में खतरा और बढ़ जाता है।
पहले भी हो चुके हैं गंभीर हादसे
मंदिर क्षेत्र में जर्जर भवनों से जुड़ी घटनाएं पहले भी जानलेवा साबित हो चुकी हैं। अगस्त 2023 में छज्जा गिरने से कई श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। इसके बावजूद अब तक पूरी तरह सुधारात्मक कार्रवाई नहीं हो पाई है।
पुलिस बनी मददगार, घायलों को समय पर पहुंचाया अस्पताल
इसी दौरान मथुरा-गोवर्धन मार्ग पर एक सड़क हादसे में घायल हुए तीन लोगों की जान पुलिस की तत्परता से बच गई। गोवर्धन थाना प्रभारी ने एंबुलेंस का इंतजार न करते हुए अपनी सरकारी गाड़ी से घायलों को अस्पताल पहुंचाया।
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