नई दिल्ली। घरेलू शेयर बाजार में गिरावट का दबाव लगातार बना हुआ है। सोमवार की कमजोरी के बाद मंगलवार को भी बाजार ने लाल निशान पर कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक दबाव में नजर आए।

सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट

मंगलवार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स करीब 525 अंक टूटकर 75,489.84 के स्तर पर आ गया। वहीं एनएसई निफ्टी भी 164 अंक गिरकर 23,651.35 पर कारोबार करता दिखा।

इससे पहले सोमवार को भी बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली थी, जब सेंसेक्स 1,312 अंक और निफ्टी 360 अंक की गिरावट के साथ बंद हुए थे।

वैश्विक तनाव और कच्चे तेल का असर

बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता और अमेरिका-ईरान के बीच तनावपूर्ण हालात ने निवेशकों की धारणा को कमजोर किया है।

ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे महंगाई और आयात लागत को लेकर चिंता बढ़ गई है।

रुपये पर भी दबाव

वैश्विक हालात का असर भारतीय मुद्रा पर भी दिखा। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 35 पैसे कमजोर होकर रिकॉर्ड निचले स्तर 95.63 पर पहुंच गया।

विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। सोमवार को उन्होंने करीब 8,400 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेच दिए, जिससे सेंटीमेंट और कमजोर हुआ।

सेक्टरल दबाव, IT शेयर सबसे ज्यादा प्रभावित

सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में आईटी और वित्तीय सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली।

TCS, Infosys, Tech Mahindra, HCL Tech, Adani Ports और Bajaj Finserv जैसे शेयरों में दबाव रहा। हालांकि इस गिरावट के बीच Bharti Airtel और NTPC ने मामूली बढ़त दर्ज की।

वैश्विक बाजारों का मिला-जुला रुख

एशियाई बाजारों में भी मिलाजुला कारोबार देखने को मिला। कोरिया और चीन के बाजारों में गिरावट रही, जबकि जापान और हांगकांग के इंडेक्स में हल्की बढ़त दर्ज की गई। अमेरिकी बाजार पिछले सत्र में सकारात्मक बंद हुए थे।

आगे का आउटलुक

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव को लेकर स्पष्टता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक घटनाक्रम आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।