पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां 1990 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मनोज अग्रवाल को राज्य का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। इससे पहले वे राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
इस नियुक्ति के बाद सियासी माहौल गर्म हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया है कि उन्हें हाल ही में संपन्न चुनाव के दौरान कथित रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पक्ष में भूमिका निभाने का “इनाम” दिया गया है। टीएमसी नेताओं का कहना है कि जिस अधिकारी की निगरानी में चुनाव प्रक्रिया पूरी हुई, उन्हें अब सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद पर बैठाना कई सवाल खड़े करता है।
वहीं दूसरी ओर, विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मनोज अग्रवाल केवल पूर्व सीईओ ही नहीं बल्कि राज्य के सबसे वरिष्ठ और अनुभवी प्रशासनिक अधिकारियों में से एक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नियुक्ति पूरी तरह नियमों और वरिष्ठता के आधार पर की गई है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि किसी को इस फैसले पर आपत्ति है तो वह उचित मंच पर अपनी बात रख सकता है।
प्रशासन की ओर से भी यह संकेत दिया गया है कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह से नियमों के तहत हुई है और इसमें किसी भी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है। सरकार का रुख है कि वह सभी फैसले कानून और सेवा नियमों के अनुसार ही ले रही है और किसी भी दबाव में कार्य नहीं करेगी।
मनोज अग्रवाल का प्रशासनिक करियर काफी लंबा और अनुभव से भरा रहा है। वे कार्मिक, प्रशासनिक सुधार, खाद्य, आपातकालीन सेवाएं और वन विभाग जैसे कई महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारी निभा चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने राज्य राजमार्ग प्राधिकरण के अध्यक्ष के तौर पर भी कार्य किया है। अपनी तकनीकी शिक्षा आईआईटी से प्राप्त करने वाले अग्रवाल को एक सख्त और दक्ष प्रशासक के रूप में जाना जाता है।