भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों की संपत्ति को बड़ा नुकसान हुआ। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में चल रहे तेज बदलावों के बीच बाजार पर दबाव बढ़ गया। इसके चलते बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण एक ही दिन में करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये घट गया।
बाजार में तेज गिरावट का कारण
कारोबारी सत्र के अंत में दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान पर बंद हुए। सेंसेक्स 719.08 अंक यानी 0.96% गिरकर 73,524.26 पर आ गया, जबकि निफ्टी 243.71 अंक (1.04%) टूटकर 23,123 के स्तर पर बंद हुआ।
निफ्टी अपने अहम सपोर्ट लेवल 23,150 से नीचे चला गया, जिससे बाजार में और कमजोरी देखने को मिली। जियो फाइनेंशियल और इटरनल जैसे प्रमुख शेयरों में 4% तक की गिरावट दर्ज की गई।
निवेशकों की संपत्ति में भारी गिरावट
बाजार में आई इस बड़ी गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। अनुमान के मुताबिक, एक ही दिन में करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू घट गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट केवल घरेलू कारणों से नहीं बल्कि वैश्विक AI ट्रेड में हो रही तेज बिकवाली और अनिश्चितता का परिणाम है।
दोहरे दबाव में भारतीय बाजार
इस समय भारतीय बाजार दो बड़े दबावों का सामना कर रहा है—
1. भू-राजनीतिक तनाव और महंगा कच्चा तेल:
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 96 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। इससे भारत जैसे आयात-आधारित देश की आर्थिक चिंता बढ़ गई है।
2. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली:
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से पूंजी निकाल रहे हैं। इस वर्ष अब तक करीब 28 अरब डॉलर के शेयर बेचे जा चुके हैं, जिससे बाजार में तरलता और भरोसे दोनों पर असर पड़ा है।
आगे बाजार का रुख कैसा रहेगा?
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक वैश्विक तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक टेक शेयरों की अस्थिरता आने वाले दिनों में बाजार को प्रभावित कर सकती है।