वैश्विक अर्थव्यवस्था में शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है और ब्रिक्स (BRICS) देश अब विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरते दिख रहे हैं। रूस के सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में वैश्विक जीडीपी वृद्धि का लगभग 49 प्रतिशत योगदान ब्रिक्स देशों से आया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्रिक्स की बढ़ती हिस्सेदारी
पुतिन के अनुसार, वर्तमान में क्रय शक्ति समता (PPP) के आधार पर ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी वैश्विक जीडीपी में करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी इस समूह का प्रभाव लगातार बढ़ा है।
उन्होंने बताया कि ब्रिक्स के गठन के बाद वैश्विक वस्तु व्यापार में इसकी हिस्सेदारी दोगुनी से अधिक हो गई है, जबकि सदस्य देशों के बीच आपसी व्यापार 1 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है।
प्रमुख आर्थिक संकेतक
- वैश्विक जीडीपी वृद्धि में 49% योगदान (पिछले 5 वर्षों में)
- PPP के आधार पर वैश्विक जीडीपी का लगभग 40% हिस्सा
- ब्रिक्स देशों के बीच 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का आपसी व्यापार
- वैश्विक हाई-टेक निर्यात में एक-तिहाई से अधिक हिस्सेदारी
तकनीक और नवाचार में बढ़त
ब्रिक्स देश अब सिर्फ पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि तकनीक और नवाचार में भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। वैश्विक हाई-टेक निर्यात में इनकी हिस्सेदारी एक-तिहाई से अधिक हो गई है।
पुतिन ने कहा कि भारत वैश्विक सॉफ्टवेयर उद्योग में मजबूत स्थिति बनाए हुए है, जबकि चीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पेटेंट में अग्रणी है। रूस भी डिजिटल टेक्नोलॉजी, फिनटेक और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था पर जोर
इस मंच पर वैश्विक आर्थिक समानता और बहुध्रुवीय व्यवस्था का मुद्दा भी प्रमुख रहा। पुतिन ने कहा कि वास्तविक विकास तभी संभव है जब इसका लाभ उन लोगों तक पहुंचे जो लंबे समय से वैश्विक अर्थव्यवस्था के हाशिये पर रहे हैं।
चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग ने भी निष्पक्ष वैश्विक व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि चीन और रूस बहुध्रुवीय दुनिया और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के पक्षधर हैं।
उभरते बाजारों की भूमिका
उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति ने बताया कि रूस और उज्बेकिस्तान के बीच सहयोग अब 50 अरब डॉलर से अधिक की संयुक्त परियोजनाओं तक पहुंच चुका है, जिसमें तकनीक और उत्पादन साझेदारी भी शामिल है।
वहीं, तंजानिया की राष्ट्रपति ने अफ्रीका के भविष्य को रेखांकित करते हुए कहा कि 2050 तक दुनिया की बड़ी आबादी अफ्रीका में होगी और कई तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं भी इसी क्षेत्र से उभरेंगी।