भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह की शुरुआत ही भारी गिरावट के साथ हुई। सोमवार को कारोबार खुलते ही बाजार लाल निशान में नजर आया और सेंसेक्स-निफ्टी दोनों में तेज गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 900 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि रुपया भी डॉलर के मुकाबले अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।

सुबह 9:29 बजे तक सेंसेक्स करीब 879.66 अंक (1.16%) गिरकर 74,358 के आसपास कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 255.80 अंक (1.08%) फिसलकर 23,387 के स्तर पर आ गया। दूसरी ओर, रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 96.20 के ऐतिहासिक निचले स्तर तक पहुंच गया।

गिरावट के पीछे बड़े कारण

बाजार में इस भारी गिरावट की मुख्य वजह वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक दबाव माने जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड यील्ड में तेजी, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और रुपये पर बढ़ता दबाव निवेशकों की धारणा को कमजोर कर रहे हैं।

पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से भी वैश्विक बाजारों में घबराहट देखी जा रही है। ड्रोन हमलों और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है, जिससे बाजार में अस्थिरता गहरा गई है।

बाजार के आंकड़े और सेक्टोरल मूवमेंट

सोमवार को 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 833.20 अंक गिरकर 74,404 के करीब पहुंच गया, जबकि निफ्टी 234 अंक टूटकर 23,401 के स्तर पर आ गया।

पिछले कारोबारी सत्र में भी बाजार कमजोर रहा था, जहां सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में हल्की गिरावट दर्ज की गई थी।

सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयर

टाटा स्टील, पावर ग्रिड, मारुति, ट्रेंट, टाइटन और एचडीएफसी बैंक जैसे बड़े शेयरों में दबाव देखने को मिला।

कुछ सेक्टरों में मजबूती

आईटी और टेलीकॉम सेक्टर में थोड़ी मजबूती रही, जहां इंफोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा और भारती एयरटेल जैसे शेयरों में हल्की बढ़त दर्ज की गई।

कच्चा तेल और ग्लोबल टेंशन से बढ़ा दबाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड करीब 111 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जिससे महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका गहरा गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और आपूर्ति मार्गों को लेकर अनिश्चितता ने तेल बाजार को प्रभावित किया है।

वैश्विक असर और निवेशकों की चिंता

अमेरिका-ईरान तनाव और पश्चिम एशिया की अस्थिरता के चलते वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की क्षमता कम हुई है। इसका असर एशियाई और अमेरिकी बाजारों में भी देखने को मिला, जहां अधिकांश इंडेक्स लाल निशान में रहे।

विदेशी निवेशकों की खरीदारी के बावजूद बाजार पर दबाव बना हुआ है, क्योंकि भू-राजनीतिक अनिश्चितता अभी भी बरकरार है।