कोलकाता में शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े बदलाव की दिशा में राज्य सरकार ने नई पहल शुरू की है। राज्य के शिक्षा ढांचे को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने की घोषणा की गई है। इस फैसले के साथ ही सरकारी और निजी दोनों तरह के शिक्षण संस्थानों को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि अब शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए जाएंगे।

मेधावी छात्रों का सम्मान समारोह

कोलकाता के धनधान्य ऑडिटोरियम में माध्यमिक, उच्च माध्यमिक, मदरसा बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई के मेधावी छात्रों के सम्मान कार्यक्रम के दौरान राज्य सरकार के प्रतिनिधियों ने शिक्षा सुधार की दिशा में अपनी प्राथमिकताएं रखीं। इस मौके पर कहा गया कि शिक्षा व्यवस्था को किसी भी प्रकार की राजनीतिक दखलअंदाजी से मुक्त किया जाएगा।

सरकार की योजना है कि हर ब्लॉक में कम से कम एक ‘पीएम श्री’ स्कूल स्थापित किया जाए, ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समान रूप से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके।

ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष फोकस

सरकार का लक्ष्य केवल महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में भी स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक तकनीक और अपडेटेड पाठ्यक्रम के जरिए शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।

अधिकारियों का मानना है कि इससे पहले की व्यवस्थाओं में आई कमियों को दूर कर शिक्षा प्रणाली को मजबूत किया जा सकेगा।

निजी संस्थानों पर सख्ती

सरकार की ओर से निजी शिक्षण संस्थानों को भी सख्त संदेश दिया गया है। स्पष्ट किया गया है कि मनमानी फीस वृद्धि या किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही यह भी कहा गया है कि अब स्कूलों और कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी में किसी भी राजनीतिक प्रतिनिधि या विधायक की भागीदारी नहीं होगी।

विवेकानंद मेरिट स्कॉलरशिप की शुरुआत

इस अवसर पर ‘विवेकानंद मेरिट स्कॉलरशिप’ योजना की भी शुरुआत की गई, जिसके तहत छात्रों को उनकी मेधा और आर्थिक जरूरत के आधार पर सहायता दी जाएगी, न कि किसी अन्य आधार पर।

सरकार ने भरोसा जताया कि यह योजना छात्रों को आगे बढ़ने में मदद करेगी और शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर सुनिश्चित करेगी।

शिक्षा सुधार को लेकर राजनीतिक गतिविधियां

दूसरी ओर, शिक्षा क्षेत्र में बदलाव के रोडमैप को लेकर भाजपा नेताओं Swapan Dasgupta और Shankar Ghosh ने विकास भवन में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की।

बैठक में यह चर्चा हुई कि नई नीतियां छात्रों, शिक्षकों और अन्य हितधारकों के सुझावों के आधार पर तैयार की जाएंगी, ताकि राज्य की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी जा सके और खोई हुई शैक्षणिक गुणवत्ता को बहाल किया जा सके।