नई दिल्ली/कोलकाता। पूर्वोत्तर भारत को देश के मुख्य भूभाग से जोड़ने वाला संवेदनशील मार्ग, जिसे सामरिक दृष्टि से ‘चिकन नेक’ कहा जाता है, अब और सुरक्षित और मजबूत होने वाला है। केंद्र सरकार ने इस मार्ग में अंडरग्राउंड रेलवे ट्रैक बिछाने की योजना बनाई है। यह खुलासा केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को बजट आवंटन पर चर्चा करते हुए किया।
सरकार की योजना: क्या बदलाव होने वाला है
-
अंडरग्राउंड ट्रैक: सिलीगुड़ी क्षेत्र में रेलवे लाइन को जमीन के नीचे बिछाया जाएगा, जिससे सुरक्षा बढ़ेगी।
-
फोर-लेन रेलवे: मौजूदा दो लाइनों की क्षमता बढ़ाकर चार लाइनों में बदलने की तैयारी है।
-
बुलेट ट्रेन: पश्चिम बंगाल को पहली बार हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन मिलने जा रही है, जो राज्य के भीतर यात्रा का समय कम करेगी और उत्तर-पूर्व व उत्तर भारत के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगी।
वाराणसी-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन और भविष्य का विस्तार
रेल मंत्री ने बताया कि बुलेट ट्रेन का पहला रूट वाराणसी से सिलीगुड़ी होगा, जो पटना (बिहार) से होकर गुजरेगा। मंत्रालय की योजना इसे भविष्य में गुवाहाटी तक विस्तार देने की है। सिलीगुड़ी को ‘चिकन नेक’ का प्रवेश द्वार मानते हुए इसे उच्च गति रेल से जोड़ने से पर्यटन, सेवा क्षेत्र और एमएसएमई इकाइयों के लिए नए अवसर उत्पन्न होंगे।
फ्रेट कॉरिडोर और औद्योगिक कनेक्टिविटी
रेल मंत्री ने यह भी बताया कि डकुनी (पश्चिम बंगाल) से गुजरात तक नया समर्पित फ्रेट कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। यह पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत के औद्योगिक और खनिज क्षेत्र को जोड़ते हुए लॉजिस्टिक्स लागत घटाने और माल ढुलाई में तेजी लाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल के जूट, कोयला और स्टील उद्योगों को इससे तेज और सीधी पहुंच मिलेगी।
सुरंग कहां बिछाई जाएगी
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) के जनरल मैनेजर चेतन कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि अंडरग्राउंड ट्रैक तीन माइल हाट और रंगापानी रेलवे स्टेशनों के बीच बनाया जाएगा।
सुरक्षा के लिहाज से क्यों महत्वपूर्ण
जनरल मैनेजर ने स्पष्ट किया कि चिकन नेक गलियारा भौगोलिक रूप से बहुत संकरा है। संकट की स्थिति में भूमिगत वैकल्पिक रेलवे मार्ग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम भूमिका निभाएगा और पूर्वोत्तर राज्यों की कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा।