मुजफ्फरनगर जनपद का महाभारत सर्किट का तीर्थ स्थल शुक्रताल प्रगति एवं विकास पथ पर अग्रसर हो रहा है। शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याण देव महाराज ने महामना मदन मोहन मालवीय जी के परामर्श पर शुकतीर्थ के पुनरुत्थान का बीड़ा उठाया। महाराज श्री ने अपना सारा जीवन ग्रामांचल में कन्या शिक्षा और शुकतीर्थ के विकास के लिए होम कर दिया। बाबू राजेन्द्र प्रसाद, जवाहरलाल नेहरू, एन.वी. गाडगिल, वी.वी गिरि, के. एम मुंशी, डॉ. संपूर्णानन्द, पं. कमलापति त्रिपाठी, अनंत शयनम आयंगर, उद्योगपति के.एन मोदी, चौ. चरण सिंह आदि अनेक नामी गिरामी हस्तियों के शुक्रताल पधारने पर आयोजित कार्यक्रमों में मैं पिताजी स्व. राजरूप सिंह वर्मा के साथ अनेक बार सम्मिलित हुआ।
महाराजश्री की कामना थी कि पवित्र भागीरथी शुकदेव आश्रम के वट के चरण पखारती कलकल निनाद करती थी, वह गंगा की पवित्र धारा फिर से शुकतीर्थ में बहे। महाराजश्री आजीवन इस प्रयास में लगे रहे। उनके बाद शुकधाम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज शुकतीर्थ में गंगा की धारा को लाने और तीर्थ के विकास में सतत सक्रिय है।
मुजफ्फरनगर के प्रमुख समाजसेवी लाला इन्द्र प्रकाश जी, उनके पुत्र पूर्व विधायक सोमांश प्रकाश जी, सुधीश प्रकाश जी, पौत्र निरंजन स्वरूप जी तथा समस्त बाबरी परिवार का शुकतीर्थ के विकास में स्वामी कल्याण देव जी तथा स्वामी ओमानंद महाराज को भरपूर सहयोग रहा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी शुकतीर्थ के विकास एवं सौंदर्यीकरण में व्यक्तिगत रुचि रखते हैं। शुकतीर्थ के विकास के लिए उन्होंने विकास परिषद का गठन कराया और 100 करोड़ रूपये की धनराशि निर्गत कराई। गाड़ियों के पार्किंग, तीर्थ यात्रियों के लिए आवास हेतु बड़े हॉल के निर्माण आरंभ हुए। मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण के निर्माण कार्यों से शुकतीर्थ का परिवेश निखर रहा है। जिला अधिकारी उमेश मिश्र समय समय पर शुकतीर्थ जाते रहते हैं।
अभी दो दिन पूर्व जिला पंचायत मुजफ्फरनगर के अध्यक्ष डॉ. वीरपाल निर्वाल तथा पूर्व विधायक अशोक कंसल जी लखनऊ में प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह से मिले और शुकतीर्थ में 200 क्यूसेक गंगा जल निरंतर प्रवाहित करने के लिए मंत्री महोदय का आभार जताया। डॉ. निर्वाल ने मंत्री जी को शुकतीर्थ के विकास से संबंधित विकास कार्यों, श्रद्धालुओं, संत समाज की सुविधाओं, पुलों, घाटों के निर्माण, आरती स्थल के उपयुक्त स्थल पर निर्माण, वर्षा जल की निकासी आदि मुद्दों पर चर्चा की और लिखित ज्ञापन भी प्रस्तुत किया।
डॉ. वीरपाल निर्वाल युवावस्था से लेकर अब तक भोपा, मोरना, भोकरहेड़ी, ककरौली, जानसठ, मीरापुर आदि ग्रामीण अंचल से जुड़े हैं।
शुकतीर्थ उनके कार्यक्षेत्र का प्रमुख धर्म स्थल है। इसके विकास में उनकी गहरी रुचि स्वाभाविक है। आशा है उनके प्रयासों से शुकतीर्थ का त्वरित विकास होगा।
गोविंद वर्मा
संपादक 'देहात'