यह कालचक्र की गति है या माध्यम बने नरेंद्र मोदी एवं योगी की सक्रियता कि परमहंस रामकृष्ण एवं परम योगी विवेकानंद की धरती पर श्रीराम का जयघोष पश्चिमी बंगाल में फिर गूंज उठा। यहीं से तों बंकिमचन्द्र ने वंदे मातरम् की रचना कर भारतमाता की बेड़ियां काटने का उद्घोष किया था।
कुछ वर्ष पूर्व हमने देखा कि शूर्पणखा रणचंडी जैसी ममता नाम धारी महिला निर्दयता से और अहंकार की भावभंगिका के साथ जय श्रीराम के नारे का अपमान और तिरस्कार कर मंच का बहिष्कार किया था। इस मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे।
फिर पश्चिमी बंगाल में माँ दुर्गा की मूर्तिविसर्जन की यात्राओं, श्रीराम की तथा रामभक्त हनुमान की शोभा यात्राओं पर हमले और पत्थरबाजी का दौर शुरू हुआ। हिन्दू महिला के केश खींच कर सड़क पर घसीटने तथा जबरिया मुँह में गोमांस ठूसने के भीभत्स दृश्य सामने आये। हिंदूवादियों के घरों, दुकानों, वाहनों को चिह्नित करके फूंका गया। कार्यकर्ताओं के शव तालाब में उतराते या पेड़ों पर टंगे मिले। सत्तालिप्सा और अहंकार लूट चरम पर पहुंच गई।
यदि रावण, कंस, जरासंध का मान-मर्दन न होता तो परमसत्ता, सृष्टि के संचालक की महिमा कौन मानता?
अपनी भवानीपुर सीट नहीं बचा पाई और सत्ताच्युत होने पर भांति-भांति झूठे बहाने बना कर चुनाव आयोग पर निराधार लांछन लगा रही है।
मीडिया के सामने बिफरते हुए बोली कि सीसीटीवी बंद कर कमरे के भीतर मुझे लात मारी।
पिछली बार घायल होने, व्हील चेयर पर नाटक का बहाना काम कर गया था।
अब तो कमरे के भीतर नहीं, जनताजनार्दन ने खुले में लात मार दी !
गोविंद वर्मा
संपादक 'देहात'