प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने विदेशी दौरे के क्रम में नीदरलैंड पहुंचे जहां चुनिंदा भारतीयों ने उनका स्वागत किया।
मेरी पुत्री रचना वर्षों से सपरिवार वहीं रह रही है। उसे श्री मोदी के हॉलैंड आने और उन्हें देखने की तीव्र उत्कंठा थी। नीदरलैंड स्थित भारतीय दूतावास से पांच दिनों तक निरंतर फोन से संपर्क करना चाहा किंतु कोई जवाब नहीं मिला। रिसीवर उठा कर कनेक्शन काटा जाता रहा।
दूतावास जाने पर बताया गया कि हमने दो हजार पास इश्यू करे हैं, आपने संपर्क नहीं किया। उनके यह कहने पर रचना ने कहा कि बार-बार एंबेसी से फोन काटा गया।
प्रधानमंत्री का प्रवासी भारतीयों से भेंट का कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय न्यायालय, दि हेग के समीप रखा गया था। सामान्य भारतीय प्रवासियों की संख्या शून्य थी। कुछ विशेष एन.जी.ओज के सदस्यों और दूतावास में सामान की आपूर्ति करने वाले चहेतों को पास की रेवड़ियां बांटी गई। नीदरलैंड के भारतीय प्रवासियों की एसोसिएशन के अध्यक्ष को भी तीन पास दिए गए थे।
मुझे दूतावास के व्यावहार से ऐसा लगा कि भारतीय ब्यूरोक्रेसी की बेहूदी प्रवृति विदेश में भी छाई हुई है।
क्या विदेश मंत्री एस. जयशंकर से अपेक्षा की जाए कि वे नीदरलैंड के भारतीय दूतावास को अच्छे व्यावहार के प्रति आगाह करेंगे।
गोविंद वर्मा
संपादक 'देहात'