मुजफ्फरनगर जनपद के वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता बाबू भंवर सिंह वर्मा का लंबी बीमारी के पश्चात मेरठ के निजी अस्पताल में 9 जून को निधन हो गया। कल उनके पैतृक ग्राम गोरधनपुर में उनको अंतिम विदाई दी गई। शोक श्रद्धांजलि अर्पित करने को गांव में बड़ी संख्या में जन समुदाय, बाबू भंवर सिंह के रिश्तेदार, परिचित, सर्व समाज के लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। हर व्यक्ति की जुबान पर बाबू भंवर सिंह के मृदुल व्यावहार और मिलनसारिता की चर्चा थी। अत्यधिक अस्वस्थ होने के कारण में उनके अंतिम दर्शन करने में विवश रहा। मेरे पुत्र अक्षय वर्मा ने गांव में पहुंच कर श्रद्धा सुमन एवं चादर अर्पित की। मोहल्ला गाजीवाला के उनके पड़ोसी दीपक शर्मा, राकेश शर्मा पूर्व प्रशासनिक अधिकारी जिला पंचायत, अनिल त्यागी आदि ने ग्राम गोरधनपुर पहुंच कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

बाबू भंवर सिंह वर्मा के साथ 40 वर्षों से अधिक समय से भाई जैसा सौहार्दपूर्ण संबंध रहा। जब डी.ए.वी. महाविद्यालय में कानून का छात्र था तब अपने परम स्नेही श्री सुखपाल सिंह माध्यम से उनसे (बाबू भंवर सिंह) से संपर्क हुआ। हमारे निवास के बिल्कुल समीप वे रहते थे। मेरठ से पेट का ऑपरेशन कराके लौटे तब उनके निवास पर मिला था। मुझको ठीक से भोजन करने और ठीक से इलाज की सलाह देने लगे। मैंने कहा- 'मुझे सलाह दे रहे हो ज़रा सा ठीक होते ही कचहरी पहुंच जाते हो, यह ठीक नहीं।' 10 दिन पूर्व बाबू भंवर सिंह जी के पास लगभग डेढ़ घंटा बैठा रहा। उन्होंने कहा- 'आप बीमार हैं घर जाकर आराम कीजिए, कुछ खाना जरूरी है।' मुझे कल्पना नहीं थी कि मेरी उनके साथ अंतिम मुलाकात है। जब तक जीवित हूं उनके प्रेम भरे व्यावहार को नहीं भुला सकता। उनकी आत्मा की शान्ति के लिए परमपिता परमात्मा से विनती है।

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः 

गोविंद वर्मा (संपादक 'देहात')