वैश्विक ऊर्जा बाजार में लगातार बने उतार-चढ़ाव के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका ने रूसी कच्चे तेल की खरीद से जुड़ी छूट को एक बार फिर बढ़ा दिया है। पहले इस छूट को आगे न बढ़ाने के संकेत दिए जा रहे थे, लेकिन अब अमेरिकी प्रशासन के इस फैसले को एक बड़े बदलाव (यू-टर्न) के तौर पर देखा जा रहा है।
16 मई तक जारी रहेगी छूट
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की ओर से जारी नए लाइसेंस के अनुसार अब विभिन्न देश 16 मई तक समुद्री मार्ग से रूसी तेल का आयात कर सकेंगे। इससे पहले यह छूट 11 अप्रैल को समाप्त हो गई थी। हालांकि, इस व्यवस्था में ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया के साथ किसी भी तरह के व्यापार को शामिल नहीं किया गया है।
इस फैसले का मुख्य उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा कीमतों में स्थिरता बनाए रखना बताया जा रहा है, खासकर उस समय जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है। इससे पहले मार्च में अमेरिका ने भारत सहित कुछ देशों को अस्थायी रूप से रूसी तेल खरीदने की अनुमति दी थी, जिसे बाद में अन्य देशों तक बढ़ाया गया था।
भारत के लिए क्या होगा असर
इस निर्णय से भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने में राहत मिलेगी। भारत पहले से ही रूस से बड़ी मात्रा में तेल आयात कर रहा है। रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने भी भारत को भरोसेमंद साझेदार बताते हुए एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति बढ़ाने की बात कही है।
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, मार्च में भारत का रूस से तेल आयात काफी बढ़ा है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की रिपोर्ट के मुताबिक मार्च में भारत ने रूस से लगभग 5.8 अरब डॉलर का कच्चा तेल खरीदा, जो फरवरी की तुलना में तीन गुना से अधिक है।
वर्ष 2024 में भी भारत रूस के कच्चे तेल का सबसे बड़े खरीदारों में शामिल रहा, जहां रोजाना लगभग 20 लाख बैरल तक का आयात दर्ज किया गया।
अमेरिका में विरोध की आवाजें
हालांकि, इस फैसले को लेकर अमेरिका के कुछ सांसदों ने असहमति जताई है। उनका कहना है कि इस तरह की छूट से रूस और ईरान जैसी अर्थव्यवस्थाओं को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिल सकता है, खासकर ऐसे समय में जब रूस-यूक्रेन युद्ध जारी है। वहीं, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने पहले संकेत दिया था कि इस छूट को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा, लेकिन अब स्थिति बदल गई है।