ईरान ने एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर रोक लगाने के अपने रुख को दोहराया है। तेहरान का कहना है कि जब तक उसके बंदरगाहों पर अमेरिका की नाकेबंदी जारी रहेगी, तब तक वह इस अहम समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही सीमित रखेगा। इस बीच, युद्धविराम की तय समयसीमा से पहले समझौते को आगे बढ़ाने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं, लेकिन बढ़ते तनाव ने मध्यस्थता की कोशिशों को मुश्किल में डाल दिया है।
पाकिस्तान की अगुवाई में चल रही मध्यस्थता प्रक्रिया पर भी इस स्थिति का असर पड़ रहा है और यह सवाल उठ रहा है कि क्या बुधवार को खत्म हो रहे युद्धविराम को आगे बढ़ाया जा सकेगा या नहीं।
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ ने एक टीवी इंटरव्यू में सख्त बयान देते हुए कहा, “जब हमारे जहाज इस जलमार्ग से नहीं गुजर सकते, तो दूसरों की आवाजाही भी संभव नहीं होने दी जाएगी।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान रणनीतिक समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर अपनी निगरानी और प्रतिबंध जारी रखेगा।
यह बयान ऐसे समय आया है जब शनिवार को ईरानी नौसेना द्वारा कथित तौर पर कुछ जहाजों पर कार्रवाई की खबरें सामने आई थीं।
हालांकि, कुछ दिनों पहले ईरान ने संकेत दिया था कि वह इस जलडमरूमध्य को फिर से खोल सकता है, खासकर इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच हुए संघर्ष विराम के बाद हालात में बदलाव को देखते हुए। लेकिन इसके बाद अमेरिका की ओर से कड़ा रुख सामने आया। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जब तक ईरान कोई समझौता नहीं करता, तब तक उसके बंदरगाहों पर अमेरिकी दबाव जारी रहेगा।
इसके जवाब में ईरान ने भी साफ कर दिया कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी रणनीतिक पाबंदियां जारी रखेगा।
इस बीच, ईरान की संसद के डिप्टी स्पीकर हामिदरेजा हाजी बाबाई के बयान ने तनाव और बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए सांसद भी “आवश्यकता पड़ने पर हथियार उठाने के लिए तैयार हैं।” एक रैली में उन्होंने दावा किया कि संसद में एक विशेष सुरक्षा इकाई का गठन किया गया है, जिसमें अधिकतर सदस्य शामिल हो चुके हैं और वे किसी भी टकराव के लिए तैयार हैं।