पश्चिम एशिया में अमेरिका और इस्राइल की कार्रवाइयों के जवाब में ईरान द्वारा मिसाइल हमले लगातार जारी हैं, जिससे क्षेत्र में संघर्ष गहरा गया है। बीते ग्यारह दिनों से बढ़ते तनाव के बीच खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है।

शांति स्थापित करने की कोशिशें कूटनीतिक मार्ग से की गईं, लेकिन ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका के साथ किसी नई बातचीत की संभावना पूरी तरह नकार दी। अराघची ने कहा कि पिछली वार्ताओं में विश्वास टूट चुका है और लगातार हमलों के बाद अब कूटनीति का कोई विकल्प नहीं बचा है।

अराघची ने एक मीडिया इंटरव्यू में बताया कि पिछले साल जून में अमेरिका के साथ वार्ता हुई थी, लेकिन बीच में उन पर हमला किया गया। इस साल भी अमेरिका ने वार्ता के दौरान हमले नहीं होने का भरोसा दिलाया, ताकि परमाणु मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान निकल सके, लेकिन इसके बावजूद अमेरिका ने हमला किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब ईरान की प्राथमिकता अमेरिका के साथ बातचीत नहीं है।

ईरान में हाल ही में नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के चयन को लेकर अराघची ने इसे स्थिरता की दिशा में कदम बताया और कहा कि नए नेतृत्व की नीतियां धीरे-धीरे स्पष्ट होंगी।

तेल की कीमतों में वृद्धि के संबंध में उन्होंने कहा कि अमेरिकी और इस्राइली हमलों के कारण ही उत्पादन और परिवहन प्रभावित हुआ है, और इसे ईरान की योजना के रूप में पेश करना सही नहीं है। उन्होंने बताया कि होर्मुज जलसंधि में जहाजों को अब सुरक्षित महसूस नहीं हो रहा।

अराघची ने मिनाब में लड़कियों के स्कूल पर हुए हमले में 170 से अधिक लोगों की मौत के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि यह हमला अमेरिकी मिसाइल से हुआ और ईरान की सैन्य प्रतिक्रिया केवल आत्मरक्षा थी। उन्होंने दोहराया कि ईरान अपने लोगों और संसाधनों की रक्षा के लिए आवश्यकतानुसार मिसाइल हमले जारी रखेगा।