निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी दो गुटों के विवाद को लेकर दोनों पक्षों से स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि पार्टी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं को लेकर किए गए दावों और आपत्तियों पर दोनों पक्ष 6 जुलाई की शाम 5:30 बजे तक अपना जवाब प्रस्तुत करें।

यह मामला तब और गहराया जब टीएमसी के भीतर ही दो अलग-अलग गुटों ने खुद को असली पार्टी प्रतिनिधि बताते हुए निर्वाचन आयोग से संपर्क किया।

टीएमसी के कथित बागी गुट की ओर से नेता ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि पार्टी के भीतर बड़ा समर्थन उनके साथ है। उन्होंने कहा कि 10 विधायकों के प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग से मुलाकात की है और उनके अनुसार बहुमत का समर्थन उनके पक्ष में है। बनर्जी ने यह भी कहा कि हाल ही में कोलकाता में हुई एक बैठक में संगठनात्मक बदलावों पर चर्चा हुई थी और उसके बाद उन्होंने आयोग से मुलाकात का समय मांगा था।

उन्होंने दावा किया कि पार्टी के अधिकांश विधायक, जिला परिषद सदस्य और पार्षद उनके साथ हैं। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी का ढांचा अब मूल विचारधारा से हटकर कुछ चुनिंदा लोगों के नियंत्रण में सिमट गया है।

उधर, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी गुट ने इन दावों को पूरी तरह खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि कथित बागी गुट के नेता पार्टी की ओर से अधिकृत प्रतिनिधि नहीं हैं और उन्हें निर्वाचन आयोग से मुलाकात की अनुमति मिलना ही सवालों के घेरे में है।

टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं ने निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल की ओर से केवल अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता ही आयोग से बातचीत कर सकते हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि आयोग का यह कदम नियमों के अनुरूप नहीं है।

फिलहाल निर्वाचन आयोग ने दोनों पक्षों से जवाब तलब कर लिया है और 6 जुलाई तक स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आयोग इस विवाद पर आगे क्या रुख अपनाता है।