अमेरिका और इज़राइल तथा ईरान के बीच लगातार बढ़ते तनाव के बीच अब सऊदी अरब सीधे निशाने पर है। खाड़ी देश में तेल क्षेत्र और हवाई अड्डों पर हाल के दिनों में हमले बढ़ गए हैं। इसी बीच रियाद में पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई।
बैठक में ईरान द्वारा किए गए हमलों और उन्हें रोकने के उपायों पर चर्चा की गई। सऊदी रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया कि यह बैठक संयुक्त रणनीतिक रक्षा समझौते के तहत हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया।
सऊदी तेल क्षेत्रों पर हमला
हाल के हमलों में ईरान ने शायबा ऑयल फील्ड को निशाना बनाया। सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, छह ड्रोन मार गिराए गए और दो बैलिस्टिक मिसाइलें प्रिंस सुल्तान एयर बेस के पास नष्ट कर दी गईं। यह क्षेत्र यूएई की सीमा के नजदीक स्थित है, और पिछले हमलों के बाद अब ईरान सीधे तौर पर इस क्षेत्र में दखल दे रहा है।
पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका अहम
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बीच पाकिस्तान ने महत्वपूर्ण कूटनीतिक भूमिका निभाई है। उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने संसद में कहा कि हाल के हमलों में कमी या प्रतिक्रिया न देने में पाकिस्तान की पहल शामिल थी। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने ईरान को आश्वस्त किया कि सऊदी अरब की भूमि का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं किया जाएगा। इस कूटनीतिक कदम ने संभावित टकराव को फिलहाल टालने में मदद की।
संघर्ष फैलने की संभावना
अब तक खाड़ी के देश सीधे संघर्ष में नहीं उभरे और अमेरिका ने भी अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं किया। लेकिन यदि ईरान के हमले जारी रहते हैं और पाकिस्तान-सऊदी अरब रक्षा समझौता सक्रिय हो जाता है, तो यह केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। पाकिस्तान और ईरान की साझा लंबी सीमा के कारण दक्षिण एशिया में भी इसका प्रभाव दिख सकता है, जिससे क्षेत्रीय भू-राजनीतिक स्थिति और जटिल हो सकती है।