पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ जल्द ही पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) और टीम के खिलाड़ियों से चैंपियंस ट्रॉफी में मेजबानों के खराब प्रदर्शन पर चर्चा करेंगे। इसकी जानकारी राजनीतिक सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने दी। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान की सरकार टीम के जल्दी बाहर होने से खफा है।

पाकिस्तान का निराशाजनक प्रदर्शन
29 साल बाद आईसीसी टूर्नामेंट की मेजबानी कर रही पाकिस्तान की टीम को चैंपियंस ट्रॉफी में करारी हार का सामना करना पड़ा। मोहम्मद रिजवान के नेतृत्व वाली टीम ने पहला मैच न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था। इस दौरान उन्हें 60 रन से शिकस्त मिली थी। इसके बाद रविवार को पाकिस्तान का सामना भारतीय टीम से हुआ। रोहित शर्मा के नेतृत्व वाली टीम ने विराट कोहली की शतकीय पारी की बदौलत चिर प्रतिद्वंद्वी को छह विकेट से हरा दिया। इस तरह पाकिस्तान का सफर टू्र्नामेंट में समाप्त हो गया। गुरुवार को गत चैंपियन की टक्कर बांग्लादेश से होनी थी। लेकिन यह मुकाबला एक भी गेंद फेंके बिना बारिश के कारण रद्द हो गया। इस तरह दोनों टीमें टूर्नामेंट से बाहर हो गईं। वहीं, न्यूजीलैंड और भारत की टीमें पहले ही सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई कर चुकी हैं।

संसद में उठाया जाएगा पाकिस्तान की हार का मुद्दा
पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने एक टीवी चैनल से बात करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय टीम के प्रदर्शन पर व्यक्तिगत रूप से बात करेंगे। वह क्रिकेट से जुड़े मुद्दों को कैबिनेट और संसद में उठाएंगे।

पाकिस्तान ने बनाया अनचाहा रिकॉर्ड
पाकिस्तान ने इसके साथ ही कुछ अनचाहे रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए हैं। 2009 के बाद यह पहली बार है जब चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबान टीम ग्रुप चरण से ही बाहर हो गई है। आखिरी बार ऐसा दक्षिण अफ्रीका के साथ हुआ था जब टीम ने तीन में से दो मैच हारे और एक में उसे जीत मिली थी। दक्षिण अफ्रीका की टीम उस वक्त ग्रुप में सबसे नीचे रही थी।

इतना ही नहीं पाकिस्तान ऐसी चौथी टीम है जो चैंपियंस ट्रॉफी में खिताब का बचाव करने उतरी, लेकिन ग्रुप चरण में ही बाहर हो गई। पहली बार ऐसा 2004 में हुआ जब भारत और श्रीलंका ग्रुप चरण में ही बाहर हो गई थी। भारत और श्रीलंका 2002 में इस टूर्नामेंट के संयुक्त विजेता बने थे। आखिरी बार 2013 में ऐसा हुआ था जब गत चैंपियन टीम ग्रुप चरण में बाहर हो गई थी। उस वक्त ऑस्ट्रेलिया कोई मैच नहीं जीत सकी थी।