पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर नाटो देशों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए आरोप लगाया कि सहयोगी देश ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य प्रयासों में साथ देने से बच रहे हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में भी योगदान नहीं दे रहे।

‘अमेरिका के बिना नाटो कमजोर’—ट्रंप

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि अमेरिका के बिना नाटो की ताकत सीमित है। उन्होंने कहा कि कई देश ईरान जैसे परमाणु क्षमता वाले देश के खिलाफ कार्रवाई में शामिल होने से हिचक रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अब वही देश तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर शिकायत कर रहे हैं, जबकि सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयासों में भागीदारी नहीं कर रहे।

उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र करते हुए कहा कि इसे सुरक्षित करना अपेक्षाकृत आसान कदम है, लेकिन सहयोगी देश इसमें भी रुचि नहीं दिखा रहे।

सहयोगी देशों से की थी अपील, नहीं मिला समर्थन

ईरान पर अमेरिका और इस्राइल के हमलों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इस स्थिति को देखते हुए ट्रंप ने कई देशों से इस क्षेत्र में सैन्य सहायता भेजने की अपील की थी।

उन्होंने कहा था कि जिन देशों के व्यापार और तेल आपूर्ति पर इसका असर पड़ रहा है, उन्हें समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाए रखने के लिए आगे आना चाहिए। हालांकि, उनकी इस अपील का अपेक्षित असर नहीं दिखा और अधिकांश सहयोगी देश इससे दूरी बनाए हुए हैं।

क्षेत्र में बढ़ता तनाव और सैन्य गतिविधियां

पश्चिम एशिया में हालात उस समय और बिगड़ गए जब फरवरी के अंत में अमेरिका और इस्राइल ने ईरान के खिलाफ बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई की। इसके बाद क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता गया।

ईरान की ओर से भी सख्त प्रतिक्रिया सामने आई है। नए नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि हमलों का जवाब दिया जाएगा और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उनकी रणनीति में बदलाव नहीं होगा। साथ ही पड़ोसी देशों को भी चेतावनी दी गई है कि वे अपने यहां विदेशी सैन्य ठिकानों को लेकर पुनर्विचार करें।