अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच जल्द ही व्यापार समझौता होने की उम्मीद है। ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना करीबी मित्र बताते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के संबंध मजबूत हैं और वार्ताएं रचनात्मक दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
ट्रंप ने कहा कि बीते वर्षों में भारत अमेरिकी उत्पादों पर अपेक्षाकृत अधिक आयात शुल्क लगाता रहा, जिससे अमेरिका को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि अब हालात बदल रहे हैं और दोनों देश ऐसे समझौते की ओर बढ़ रहे हैं जिससे व्यापारिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।
इधर, भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत जारी है। इसी क्रम में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में भारत का दौरा किया, जहां चार दिनों तक दोनों पक्षों के बीच विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। वार्ता में अमेरिकी दल का नेतृत्व मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच ने किया, जबकि भारतीय पक्ष का नेतृत्व वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन ने संभाला।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच चर्चा सहयोगात्मक और व्यावहारिक माहौल में हुई। दोनों पक्ष ऐसे समझौते पर सहमत होने के लिए प्रयासरत हैं, जिससे व्यापार और निवेश के अवसर बढ़ें तथा दोनों अर्थव्यवस्थाओं को समान लाभ मिल सके।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल पहले ही संकेत दे चुके हैं कि समझौते के पहले चरण से जुड़े अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और केवल कुछ बिंदुओं पर चर्चा शेष है। उल्लेखनीय है कि फरवरी में दोनों देशों ने व्यापार समझौते के प्रारंभिक ढांचे पर सहमति बनाई थी, लेकिन बाद में अमेरिकी शुल्क नीतियों में बदलाव के कारण कुछ प्रावधानों की दोबारा समीक्षा की जा रही है।
प्रस्तावित समझौते के तहत भारत ने कई अमेरिकी कृषि और औद्योगिक उत्पादों पर शुल्क में राहत देने की पेशकश की है। साथ ही, अगले कुछ वर्षों में अमेरिका से ऊर्जा, विमानन, तकनीक, कीमती धातुओं और कोकिंग कोल समेत बड़े पैमाने पर आयात बढ़ाने की इच्छा भी जताई है।
अमेरिका फिलहाल भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच बढ़ता व्यापार और निवेश सहयोग इस समझौते को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।
इस बीच, अमेरिकी प्रशासन ने कई देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की नई योजना का भी एलान किया है। अमेरिका का आरोप है कि कुछ देशों से आयात होने वाले उत्पाद कथित तौर पर जबरन श्रम के जरिए तैयार किए जाते हैं। इसी आधार पर भारत सहित कई देशों को एक सूची में शामिल किया गया है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) के प्रस्ताव के अनुसार, ऐसे देशों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। यह कदम 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत प्रस्तावित किया गया है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय और उसके प्रभावों पर अभी आगे चर्चा जारी है।