संयुक्त राष्ट्र ने अपनी एक आगामी रिपोर्ट में इजरायल और रूस के सुरक्षा बलों को उन पक्षों की सूची में शामिल किया है, जिन पर सशस्त्र संघर्षों के दौरान यौन हिंसा और बलात्कार जैसे गंभीर आरोपों में संलिप्तता के विश्वसनीय संकेत मिले हैं। इस रिपोर्ट की समीक्षा एएफपी द्वारा की गई है, जिसमें कई चौंकाने वाले निष्कर्ष सामने आए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, जांचकर्ताओं को संबंधित क्षेत्रों तक पहुंच नहीं दिए जाने के बावजूद फिलिस्तीनी बंदियों और यूक्रेनी युद्धबंदियों के साथ यौन शोषण के कई विश्वसनीय मामले दर्ज किए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इससे पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि ऐसी घटनाएं जारी रहीं तो दोनों देशों को इस सूची में शामिल किया जा सकता है।
जांच में सहयोग न मिलने पर बढ़ी सख्ती
संयुक्त राष्ट्र दस्तावेज में यह भी उल्लेख किया गया है कि बार-बार अनुरोध के बावजूद दोनों देशों के अधिकारियों ने जांच टीमों को आवश्यक पहुंच देने से इनकार किया। इस सहयोग की कमी के चलते जांच प्रक्रिया बाधित हुई, लेकिन इसके बावजूद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
संयुक्त राष्ट्र ने इजरायली सेना, सुरक्षा बलों और जेल सेवाओं से जुड़े कुछ मामलों को चिन्हित करते हुए कहा है कि हिरासत केंद्रों तक पूर्ण पहुंच न होने के कारण व्यापक आकलन करना संभव नहीं हो पाया।
संघर्षों में यौन हिंसा के गंभीर आरोप
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यह सूची उन पक्षों को दर्शाती है जिन पर युद्ध या संघर्ष के दौरान यौन हिंसा को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के आरोप हैं। इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एजेंडे के तहत गंभीर उल्लंघनों की श्रेणी में रखा जाता है।
इजरायल ने इस रिपोर्ट और उसमें लगाए गए आरोपों की कड़ी आलोचना की है। वहीं रूस के संबंध में रिपोर्ट में कहा गया है कि उसके सशस्त्र बलों और जेल सेवाओं पर कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्रों के साथ-साथ रूस के भीतर भी यौन हिंसा के मामलों के आरोप हैं।
यूक्रेन में मानवाधिकार निगरानी मिशन के आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट में कुल 310 मामलों का उल्लेख किया गया है, जिनमें बलात्कार, शारीरिक उत्पीड़न और इलेक्ट्रिक शॉक जैसी गंभीर घटनाएं शामिल हैं।