पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान की नौसैनिक क्षमताओं पर बड़ा हमला किया है। ट्रंप के अनुसार, इस कार्रवाई में ईरान के कई जहाजों और बारूदी सुरंग बिछाने वाली नौकाओं को नष्ट कर दिया गया। उनका कहना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उठाया गया।
ट्रंप ने बताया कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत कड़ी सैन्य कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि यह अभियान “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के अंतर्गत चलाया जा रहा है, जिसका लक्ष्य ईरान से उत्पन्न खतरे को कम करना है। उनके मुताबिक, कम समय में ही इस अभियान के दौरान ईरान की कई सैन्य क्षमताओं को नुकसान पहुंचाया गया है।
सुरंग बिछाने की तैयारी की जानकारी मिलने के बाद कार्रवाई
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को सूचना मिली थी कि ईरान समुद्री मार्गों में बारूदी सुरंगें बिछाने की योजना बना रहा है। यदि ऐसा होता तो जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती और वैश्विक व्यापार पर असर पड़ता। इसी संभावित खतरे को रोकने के लिए अमेरिकी सेना ने कार्रवाई की। ट्रंप का दावा है कि इस दौरान माइन बिछाने वाली कई नौकाओं और नौसैनिक पोतों को निशाना बनाकर नष्ट किया गया।
दर्जनों जहाजों को नष्ट करने का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि होर्मुज क्षेत्र में ईरान के 58 नौसैनिक जहाज नष्ट कर दिए गए हैं। इसके अलावा कम से कम 31 ऐसी नावों को भी खत्म किया गया है, जिनका इस्तेमाल बारूदी सुरंगें बिछाने के लिए किया जाता था। उनके अनुसार, इस ऑपरेशन में आधुनिक हथियारों और तकनीक का उपयोग किया गया।
ईरान की सैन्य ताकत को बड़ा झटका—ट्रंप
ट्रंप ने दावा किया कि पिछले लगभग 11 दिनों की कार्रवाई में ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उनके मुताबिक, ईरान की वायुसेना लगभग निष्क्रिय हो चुकी है और कई रडार सिस्टम नष्ट कर दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मिसाइल क्षमता करीब 90 प्रतिशत और ड्रोन क्षमता लगभग 85 प्रतिशत तक कमजोर हो चुकी है। साथ ही अमेरिकी सेना ईरान के हथियार निर्माण से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बना रही है।
तेल बाजार पर बढ़ा असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। ट्रंप के अनुसार, स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने विभिन्न देशों के रणनीतिक भंडार से करीब 400 मिलियन बैरल तेल जारी करने पर सहमति जताई है, ताकि तेल की कीमतों को स्थिर रखा जा सके और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो।
अमेरिका ने संघर्ष जारी रखने के संकेत दिए
ट्रंप ने कहा कि जब तक खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं होता, तब तक अमेरिका अपने अभियान को अधूरा नहीं छोड़ेगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी सेना आवश्यक कदम उठाती रहेगी।
वैश्विक स्तर पर बढ़ रही चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य टकराव पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता पैदा कर रहा है। इसका प्रभाव न केवल ऊर्जा बाजार पर बल्कि समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ रहा है। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर कई देशों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है।