ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान के बीच शुक्रवार को संघर्ष का 14वां दिन पूरा हो गया। इसी दौरान गुरुवार को पश्चिमी इराक में अमेरिकी वायुसेना का एक KC-135 स्ट्रैटोटैंकर रिफ्यूलिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह घटना अमेरिका और इजरायल द्वारा चलाए जा रहे संयुक्त अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के दौरान सामने आई।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि यह हादसा मित्र देशों के नियंत्रण वाले एयरस्पेस में हुआ। मिशन के दौरान दो विमान ऑपरेशन में शामिल थे। इनमें से एक विमान सुरक्षित रूप से उतरने में सफल रहा, जबकि दूसरा दुर्घटना का शिकार हो गया।

यूएस आर्मी का बयान
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार शुरुआती जांच में यह साफ हुआ है कि दुर्घटना किसी दुश्मन हमले या फ्रेंडली फायर का परिणाम नहीं थी। फिलहाल घटनास्थल पर बचाव और जांच अभियान जारी है। सेना ने कहा है कि अब तक किसी सैनिक की मौत की पुष्टि नहीं हुई है।

अधिकारियों के बयान से यह संकेत भी मिला है कि मिशन के दौरान दोनों विमानों के बीच दूरी कम हो जाने या तकनीकी कारणों से हादसा हुआ हो सकता है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही की जाएगी।

ईरान समर्थित गुट का दावा
दूसरी ओर ईरान समर्थित सशस्त्र संगठन इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक ने दावा किया है कि पश्चिमी इराक में अमेरिकी रिफ्यूलिंग विमान को उसी ने निशाना बनाया। संगठन ने बयान जारी कर कहा कि उसने अपने देश की संप्रभुता और हवाई क्षेत्र की रक्षा के लिए KC-135 विमान को गिराया है।

अमेरिका को बढ़ती चुनौतियां
यह घटना अमेरिकी सेना के लिए मौजूदा अभियान के दौरान सामने आई नई चुनौती मानी जा रही है। ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी और तब से कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 1 मार्च को तीन F-15E लड़ाकू विमानों को फ्रेंडली फायर से नुकसान पहुंचा था, हालांकि सभी पायलट सुरक्षित बच गए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक इस अभियान में सात अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 140 सैनिक घायल हुए हैं।