अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई, जहां दोनों देशों के बीच जारी टकराव को करीब 50 दिन हो चुके हैं। इसके बावजूद अब तक किसी ठोस समाधान के संकेत नहीं मिले हैं।

ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका बार-बार भरोसा तोड़ रहा है। इसी के चलते तेहरान ने घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान सागर से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही पर तत्काल प्रभाव से कड़े प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। ईरान का कहना है कि अब इस अहम समुद्री मार्ग पर उसकी नौसेना का सख्त नियंत्रण रहेगा।

ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी पर दी चेतावनी

ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह ईरान के नियंत्रण में है। उन्होंने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरानी बंदरगाहों और जहाजों पर लगाई गई नाकाबंदी जारी रहती है, तो इस मार्ग से जहाजों का आवागमन पूरी तरह रोका जा सकता है।

गालिबफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अमेरिकी दबाव की स्थिति में होर्मुज का रास्ता खुला नहीं रहेगा और यहां से गुजरने वाले जहाजों को ईरान की अनुमति लेनी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस मार्ग पर नियंत्रण का फैसला क्षेत्रीय हालात के आधार पर किया जाएगा।

आईआरजीसी ने भी किया बड़ा ऐलान

ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी जलडमरूमध्य को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। आईआरजीसी ने कहा कि अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों और जहाजों पर लगाई गई पाबंदियां युद्धविराम के उल्लंघन के समान हैं। इसी वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा पहले जैसी स्थिति में लाकर ईरानी सशस्त्र बलों के कड़े नियंत्रण में रखा गया है।

समाचार एजेंसियों और शिपिंग संगठनों के मुताबिक, शनिवार को होर्मुज से गुजरने की कोशिश कर रहे दो जहाजों पर ईरानी गनबोट्स ने फायरिंग की। इनमें से एक जहाज भारतीय झंडे वाला तेल टैंकर बताया जा रहा है। इस घटना के बाद कई व्यावसायिक जहाजों ने अपना मार्ग बदल लिया या वापस लौट गए।

एक दिन पहले खुला बताया गया था रास्ता

दिलचस्प बात यह है कि इससे एक दिन पहले यानी शुक्रवार को ईरान ने इस जलडमरूमध्य को व्यावसायिक जहाजों के लिए पूरी तरह खुला घोषित किया था। उस घोषणा के बाद वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तेज गिरावट भी दर्ज की गई थी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी दावा किया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य व्यापार के लिए पूरी तरह सुरक्षित है और ईरान अमेरिकी सहयोग से समुद्री खदानों को हटाने का काम कर रहा है।

अमेरिका के प्रस्तावों पर विचार

इस बीच ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा है कि अमेरिका की ओर से मिले नए प्रस्तावों की समीक्षा की जा रही है। हालांकि परिषद ने यह भी स्पष्ट किया कि वार्ता में शामिल ईरानी प्रतिनिधिमंडल किसी भी तरह की रियायत या समझौता करने के लिए तैयार नहीं है।

राज्य मीडिया के अनुसार, हाल के दिनों में पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व की मौजूदगी में तेहरान में बातचीत के लिए नए प्रस्ताव सामने आए हैं। फिलहाल ईरान इन प्रस्तावों का अध्ययन कर रहा है और अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

पाकिस्तान निभा रहा मध्यस्थ की भूमिका

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान इस विवाद में दोनों देशों के बीच मध्यस्थ के तौर पर उभरा है। पिछले सप्ताह उसने शुरुआती दौर की बातचीत की मेजबानी भी की थी, लेकिन वह बिना किसी ठोस समझौते के समाप्त हो गई।