नोएडा में औद्योगिक क्षेत्रों की सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए प्रशासन इस बार पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। 13 अप्रैल को हुए औद्योगिक हिंसा और बवाल की घटना के बाद, श्रमिक दिवस के मौके पर पुलिस और प्रशासन किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए कड़े इंतजाम कर रहे हैं।
पिछले कुछ वर्षों में वेतन संबंधी मुद्दों को लेकर उपजे तनाव और हालिया घटनाओं को देखते हुए, इस बार श्रमिक संगठनों की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। लोकल इंटेलिजेंस यूनिट के साथ-साथ पुलिस टीमों को औद्योगिक क्षेत्रों में तैनात किया गया है, ताकि किसी भी तरह की भीड़ या विवाद की स्थिति को रोका जा सके।
प्रशासन की सख्ती के चलते कई श्रमिक संगठनों ने इस बार अपने कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया है। पुलिस ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बिना अनुमति किसी भी प्रकार की सभा या जमावड़े की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही संदिग्ध गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है।
इंटक (इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस) के जिला अध्यक्ष केपी ओझा ने कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल श्रमिक हितों की बात करना है और किसी भी प्रकार की अशांति फैलाने वाले तत्वों से उनका कोई संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि हालात को देखते हुए सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं।
सीटू (CITU) के महासचिव राम स्वारथ के अनुसार, संगठन ने प्रशासन को केवल सीमित कार्यक्रम जैसे झंडा परिवर्तन और मिठाई वितरण की जानकारी दी थी, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए इसे भी सादगी से करने का निर्णय लिया गया है।
वहीं हिंद मजदूर सभा के प्रदेश सचिव राघवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि हर साल आयोजित होने वाले पारंपरिक कार्यक्रम इस बार पुलिस की सख्ती के कारण नहीं किए जाएंगे।
इस बीच पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं। डीआईजी यमुना प्रसाद ने सेक्टर 62 सहित औद्योगिक क्षेत्रों का निरीक्षण किया और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। प्रमुख स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है और लगातार गश्त जारी है, ताकि औद्योगिक शांति बनी रहे और किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।