कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी राजनीतिक अटकलों के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि फिलहाल सिद्धारमैया ही राज्य के मुख्यमंत्री बने रहेंगे। हालांकि, उनके एक अन्य बयान में सोनिया गांधी की भूमिका का उल्लेख होने पर भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

‘फैसले सामूहिक रूप से लिए जाते हैं’: खरगे

मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि मुख्यमंत्री बदलने को लेकर समय-समय पर चर्चाएं होती रहती हैं, लेकिन अंतिम निर्णय संगठन के वरिष्ठ नेताओं की सामूहिक राय से लिया जाता है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस में राष्ट्रीय अध्यक्ष, संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी और विपक्ष के नेता राहुल गांधी मिलकर महत्वपूर्ण फैसलों पर विचार करते हैं।

खरगे ने जोर देकर कहा कि पार्टी में कोई भी बड़ा निर्णय वरिष्ठ नेतृत्व से चर्चा के बिना नहीं लिया जाता। उन्होंने यह भी कहा कि अभी इस विषय पर कोई तय तारीख या निर्णय नहीं हुआ है, इसलिए इस पर अटकलें लगाना सही नहीं होगा।

भाजपा का हमला, कांग्रेस में सियासी हलचल

खरगे के बयान के बाद भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व को घेरते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं ने यहां तक सवाल उठाए कि क्या वास्तविक निर्णय पार्टी अध्यक्ष लेते हैं या कोई और।

कर्नाटक में नेतृत्व को लेकर खींचतान

कर्नाटक कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थकों के बीच नेतृत्व को लेकर मतभेद लंबे समय से जारी हैं। 2023 के कथित सत्ता-साझाकरण समझौते का हवाला देते हुए कुछ नेता शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग कर रहे हैं।

इस राजनीतिक खींचतान के बीच राज्य सरकार में संतुलन बनाए रखने के लिए दोनों नेताओं के बीच कई दौर की बैठकें भी हो चुकी हैं।

सरकार के कार्यकाल के बीच बढ़ी चर्चा

पिछले वर्ष नवंबर में सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद यह मुद्दा और तेज हो गया। पार्टी के अंदरूनी समीकरणों में गृह मंत्री जी परमेश्वर को भी एक अहम चेहरा माना जा रहा है।

खरगे ने पहले भी संकेत दिए थे कि कांग्रेस आलाकमान जल्द ही इस मुद्दे का समाधान निकालने की कोशिश करेगा, ताकि राज्य में राजनीतिक स्थिरता बनी रहे।