अहमदाबाद में पिछले साल जून में हुए एयर इंडिया फ्लाइट AI-171 हादसे को लेकर एक नया दावा सामने आया है, जिसने मामले पर फिर से बहस छेड़ दी है। हादसे में अपने परिजनों को खो चुके रोमिन वोहरा ने कहा है कि उन्होंने अहमदाबाद सिविल अस्पताल की मॉर्चरी में कैप्टन सुमीत सभरवाल का शव देखा था, जो कथित तौर पर ऐसी स्थिति में था जैसे वे अंतिम समय तक विमान को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हों।

मॉर्चरी में क्या देखा गया?

खेड़ा जिले के रहने वाले और पेशे से लैब टेक्नीशियन रोमिन वोहरा का कहना है कि मेडिकल क्षेत्र से जुड़े होने के कारण उन्हें 13 जून को मॉर्चरी में जाने की अनुमति मिली थी। उनके अनुसार, कैप्टन का शव एक टेबल पर रखा था और शरीर कठोर अवस्था में था। उनका दावा है कि शव की मुद्रा ऐसी थी जैसे पायलट अपनी सीट पर बैठे हों—पैर मुड़े हुए और हाथ आगे की ओर फैले हुए।

रोमिन ने यह भी बताया कि शव की पहचान वर्दी और बाद में तस्वीरों के आधार पर की गई। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने इस हादसे में अपने भाई, भतीजी और चाची को खो दिया था।

हादसा कैसे हुआ था?

यह दर्दनाक हादसा 12 जून को हुआ था, जब लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद मेघानीनगर इलाके के एक हॉस्टल परिसर में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में विमान में सवार 241 यात्रियों और जमीन पर मौजूद 19 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि केवल एक यात्री जीवित बच पाया था। विमान का संचालन कैप्टन सुमीत सभरवाल और को-पायलट क्लाइव कुंडर कर रहे थे।

कानूनी फर्म ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग

इस नए दावे के बाद अमेरिका स्थित कानूनी फर्म ‘चियोनुमा लॉ’ ने मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। फर्म का कहना है कि अगर पायलट ने अंतिम क्षणों तक नियंत्रण बनाए रखा, तो हादसे के कारणों को नए सिरे से समझने की जरूरत है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विशेषज्ञ जांच आवश्यक है।

शुरुआती जांच रिपोर्ट में क्या कहा गया था?

विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया गया था कि उड़ान भरने के कुछ सेकंड बाद विमान के इंजन के फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद हो गए थे। कॉकपिट रिकॉर्डिंग में पायलटों के बीच इस पर बातचीत का भी जिक्र था। रिपोर्ट के अनुसार, ईंधन आपूर्ति बाधित होने के बाद इंजन के पैरामीटर तेजी से गिरने लगे।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी पिछले वर्ष कहा था कि किसी भी जांच में अब तक मुख्य पायलट पर सीधे तौर पर जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। कोर्ट ने पायलट के परिवार को भावनात्मक दबाव से बचने की सलाह दी थी।