लोकसभा में महिला आरक्षण पर चल रही चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के संबोधन के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में विस्तृत जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कुछ मुद्दों पर फैलाई जा रही गलतफहमियों को दूर करना जरूरी है, ताकि देश में किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व पर स्पष्टीकरण

अमित शाह ने कहा कि यह दावा सही नहीं है कि नए विधेयकों से दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व घटेगा। उन्होंने सदन में आंकड़े पेश करते हुए बताया कि 543 सांसदों वाले लोकसभा ढांचे में दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी पहले भी लगभग 23.76 प्रतिशत थी, जो आगे चलकर 23.97 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।

उन्होंने कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल के उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों की लोकसभा में हिस्सेदारी या तो बढ़ेगी या लगभग स्थिर रहेगी। उनके अनुसार कर्नाटक की सीटें 28 से बढ़कर 42 तक पहुंच सकती हैं, जबकि अन्य राज्यों में भी मामूली वृद्धि या स्थिरता बनी रहेगी।

गृह मंत्री ने कहा कि दक्षिण भारत के प्रतिनिधित्व को लेकर जो “नैरेटिव” बनाया जा रहा है, वह तथ्यों पर आधारित नहीं है और वास्तविकता इससे अलग है।

महिला आरक्षण और जनसंख्या गणना पर बयान

अमित शाह ने महिला आरक्षण विधेयक का उल्लेख करते हुए कहा कि 33 प्रतिशत आरक्षण के तहत लोकसभा की संरचना में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को और मजबूत बनाएगी।

जातीय जनगणना के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने इस दिशा में निर्णय ले लिया है और यह प्रक्रिया भविष्य में पूरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनगणना से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना आवश्यक है और सरकार इस पर पारदर्शी तरीके से काम कर रही है।

परिसीमन आयोग और चुनाव प्रक्रिया पर स्थिति

गृह मंत्री ने कहा कि परिसीमन आयोग को लेकर भी गलत धारणा बनाई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा कानूनों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और परिसीमन प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार ही होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि आगामी चुनाव मौजूदा व्यवस्था के आधार पर ही होंगे और किसी भी प्रकार का तत्काल बदलाव लागू नहीं किया जाएगा।

विपक्ष पर तीखी टिप्पणी

अमित शाह ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ लोग सरकार पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगा रहे हैं, जबकि देश का लोकतंत्र पूरी तरह मजबूत है। उन्होंने कहा कि 130 करोड़ नागरिकों की इच्छा को कोई भी प्रभावित नहीं कर सकता।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत का लोकतंत्र बेहद मजबूत है और आपातकाल के दौर जैसी चुनौतियों के बावजूद देश ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखा है।