लोकसभा में रविवार (1 फरवरी) को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। लगभग 85 मिनट तक चले इस भाषण में किसान, रेलवे, रोजगार, इंफ्रास्ट्रक्चर और विभिन्न क्षेत्रों के लिए बड़े ऐलान किए गए। हालांकि आम जनता के लिए कोई बहुत बड़ा उपहार नहीं देखा गया, जिससे विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए।
विपक्ष का रुख:
कांग्रेस ने बजट को ‘फीका’ करार दिया। महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि जिस तरह से बजट 2026-27 को पहले हाइलाइट किया गया था, उसके मुकाबले यह कमजोर साबित हुआ। राहुल गांधी ने फिलहाल संसद में कोई टिप्पणी नहीं दी और कहा कि वह अगले दिन अपने विचार रखेंगे।
सांसद शशि थरूर ने केरल में आयुर्वेद संस्थान के ऐलान न होने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि बजट में मछुआरों और नारियल का जिक्र किया गया, लेकिन केरल का नाम नहीं आया।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रेल कॉरिडोर के बजट ऐलान को झूठ बताया और कहा कि राज्य पहले से ही काम शुरू कर चुका है।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि यह बजट गरीब और ग्रामीण जनों के लिए नहीं है। उनकी पत्नी और सांसद डिंपल यादव ने भी बजट को आम आदमी के दृष्टिकोण से निराशाजनक बताया।
सत्तापक्ष की प्रतिक्रिया:
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बजट को ऐतिहासिक और अभूतपूर्व बताया। उन्होंने इसे 2047 के विकसित भारत के निर्माण की मजबूत नींव करार दिया।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उत्पादन, IT सर्विसेज और ऑरेंज इकोनॉमी पर बजट के सकारात्मक प्रभाव की चर्चा की और 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा को सराहा।
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने इसे सामाजिक और आर्थिक न्याय का संतुलित बजट बताया।
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इसे प्रगतिशील बजट कहा, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के हर सेक्टर को बढ़ावा देगा।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि बजट AI, इलेक्ट्रॉनिक्स और कस्टम ड्यूटी सुधार के माध्यम से व्यापार और आम लोगों को फायदा पहुंचाएगा।
पूर्व केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने इसे विकसित भारत की दिशा में प्रगतिशील कदम बताया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट को आशा और आकांक्षाओं का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इसमें महिलाओं के लिए छात्रावास, युवाओं के लिए अवसर और स्वास्थ्य क्षेत्र पर जोर दिया गया है।