केंद्रीय बजट से पहले रविवार को शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। दिन के कारोबार में हालांकि कभी तेजी तो कभी गिरावट का दौर चलता रहा, लेकिन बजट में टैक्स बढ़ाने से जुड़ी घोषणाओं के बाद बाजार दबाव में आ गया। दोपहर करीब 12:15 बजे सेंसेक्स 265 अंक फिसलकर 82,004.56 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 131.35 अंक टूटकर 25,189.30 के स्तर पर आ गया।
हालांकि इससे पहले कारोबार के दौरान बाजार में मजबूती भी देखी गई थी। सुबह करीब 10:39 बजे सेंसेक्स 255.96 अंक चढ़कर 82,525.74 और निफ्टी 56.60 अंक बढ़कर 25,377.25 तक पहुंच गया था। शुरुआती सत्र में भी बाजार सीमित गिरावट के साथ खुला था, जब सेंसेक्स 15.04 अंक टूटकर 82,254.74 और निफ्टी 31.75 अंक गिरकर 25,288.90 पर कारोबार कर रहा था।
रविवार को भी खुले रहे शेयर बाजार
आम तौर पर शनिवार और रविवार को शेयर बाजार बंद रहते हैं, लेकिन वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश होने के कारण इस बार रविवार को भी कारोबार हुआ। एनएसई और बीएसई ने बजट भाषण के मद्देनज़र विशेष व्यवस्था करते हुए बाजार खोलने का फैसला लिया, ताकि निवेशक अहम घोषणाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया दे सकें।
एक्सचेंजों द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, 1 फरवरी को ‘स्पेशल लाइव ट्रेडिंग सेशन’ आयोजित किया गया। दोनों एक्सचेंजों का मानना है कि बजट से जुड़ी नीतिगत घोषणाओं का असर बाजार पर तुरंत दिखना चाहिए, इसलिए छुट्टी के दिन भी कारोबार जरूरी था। आज़ाद भारत के इतिहास में इससे पहले केवल एक बार 28 फरवरी 1999 को, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान, रविवार को शेयर बाजार खुला था।
क्यों जरूरी माना गया रविवार को बाजार खोलना?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार बजट के दिन बाजार खुला रहना निवेशकों के लिए बेहद अहम है। वित्त मंत्री का बजट भाषण आमतौर पर सुबह 11 बजे शुरू होता है, जिसमें टैक्स, राजकोषीय घाटा और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े बड़े ऐलान किए जाते हैं।
रविवार को बाजार खोलने से तीन बड़े फायदे सामने आते हैं—
पहला, निवेशकों को बजट के असर का तुरंत अंदाजा लग जाता है और वे उसी समय खरीद-फरोख्त का फैसला ले सकते हैं।
दूसरा, अगर बाजार बंद रहता तो सोमवार तक अनिश्चितता बनी रहती, जिससे जोखिम बढ़ सकता था। खुले बाजार में निवेशक अपनी पोजीशन तुरंत संभाल सकते हैं।
तीसरा, लाइव ट्रेडिंग से छुट्टी के दिन होने वाली ऑफ-मार्केट सट्टेबाजी पर भी लगाम लगती है और पारदर्शिता बनी रहती है।