नई दिल्ली। बलूचिस्तान में अशांति को लेकर पाकिस्तान द्वारा लगाए गए आरोपों पर भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें पूरी तरह खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि इस तरह के बयान पाकिस्तान की अपनी अंदरूनी नाकामियों से ध्यान हटाने की कोशिश भर हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत पर लगाए गए आरोपों का कोई आधार नहीं है। उनके मुताबिक पाकिस्तान हर बार जब देश के भीतर हालात बिगड़ते हैं, तो बाहरी हाथ का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करता है।

‘आंतरिक समस्याओं से ध्यान भटकाने की रणनीति’

रणधीर जायसवाल ने कहा कि हिंसा की हर घटना के बाद इस तरह के आरोप दोहराने के बजाय पाकिस्तान को अपने लोगों की वास्तविक शिकायतों और मांगों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान का मानवाधिकार रिकॉर्ड, खासकर अशांत क्षेत्रों में, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाना-पहचाना है।

भारत की यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान सेना के उस बयान के बाद आई है, जिसमें दावा किया गया था कि भारत बलूचिस्तान में सक्रिय आतंकवादी गुटों को समर्थन दे रहा है।

पाक सेना का दावा – उग्रवादियों के खिलाफ कार्रवाई

पाकिस्तान की सेना ने बताया है कि बलूचिस्तान में चलाए गए आतंकवाद-रोधी अभियानों में 15 सैनिकों और 92 उग्रवादियों की मौत हुई है। सेना के अनुसार, क्वेटा, मस्तूंग, नुश्की, दल्बंदीन, खारन और पंजगुर जैसे इलाकों में हमलों के बाद ये ऑपरेशन शुरू किए गए थे, जिनके पीछे जातीय बलूच उग्रवादी संगठनों का हाथ बताया जा रहा है।