प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की एक खास तस्वीर सामने आई है, जिसे कूटनीतिक हलकों में ‘कार डिप्लोमेसी’ के रूप में देखा जा रहा है। यह तस्वीर न सिर्फ भारत-जर्मनी के मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों को दर्शाती है, बल्कि दोनों नेताओं के बीच बढ़ती व्यक्तिगत निकटता और आपसी सहजता की झलक भी देती है।
जर्मन चांसलर के पहले भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें भारतीय संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराया। उनकी अगवानी गुजरात में की गई, जहां मर्ज ने साबरमती आश्रम पहुंचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने गांधीजी के विचारों को आज की वैश्विक परिस्थितियों में भी प्रासंगिक बताया।
आर्थिक साझेदारी को लेकर साझा संदेश
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज ने दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों और शीर्ष सीईओ से मुलाकात की। इस बैठक में भारत-जर्मनी आर्थिक सहयोग को और आगे बढ़ाने पर सहमति जताई गई। पीएम मोदी ने कहा कि वर्तमान में करीब दो हजार जर्मन कंपनियां भारत में सक्रिय रूप से कारोबार कर रही हैं, जो दोनों देशों के मजबूत औद्योगिक रिश्तों का प्रमाण है।
वैश्विक नेताओं के साथ ‘कार डिप्लोमेसी’ की झलक
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ इस तरह की अनौपचारिक लेकिन प्रतीकात्मक यात्राएं पहले भी कई वैश्विक नेताओं के साथ देखने को मिल चुकी हैं। 16 दिसंबर 2025 को जॉर्डन दौरे के दौरान क्राउन प्रिंस अल हुसैन बिन अब्दुल्ला द्वितीय स्वयं कार चलाकर पीएम मोदी को अम्मान स्थित जॉर्डन म्यूजियम तक ले गए थे। इसे भारत-जॉर्डन के भरोसेमंद और आत्मीय रिश्तों का संकेत माना गया।
इसके बाद जॉर्डन से इथियोपिया रवाना हुए प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद ने अदीस अबाबा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर किया। दोनों नेताओं ने एक ही गाड़ी में यात्रा की और इस दौरान पीएम मोदी को साइंस म्यूजियम और फ्रेंडशिप पार्क भी दिखाए गए, जो आधिकारिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं थे।
रूस और चीन में भी दिखी नजदीकी
4 दिसंबर 2025 को भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी एक ही कार में नजर आए थे। पालम एयरपोर्ट से प्रधानमंत्री आवास तक की इस यात्रा में खास बात यह रही कि दोनों नेता किसी विशेष बुलेटप्रूफ वाहन की बजाय सामान्य सफेद टोयोटा फॉर्च्यूनर में साथ बैठे थे। इससे पहले 1 सितंबर 2025 को चीन के तियानजिन में हुए शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन के दौरान भी मोदी और पुतिन ने एक साथ कार यात्रा की थी।
इन घटनाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के बढ़ते कूटनीतिक विश्वास, व्यक्तिगत नेतृत्व संबंधों और अनौपचारिक संवाद की मजबूत परंपरा के रूप में देखा जा रहा है।