सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में हुई हिंसा और सात न्यायिक अधिकारियों को नौ घंटे तक बंधक बनाए जाने के मामले का स्वत: संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाया और अधिकारियों के रवैये पर सख्त टिप्पणी की।
CJI ने सवाल उठाया कि डीएम और पुलिस अधीक्षक (SP) घटना स्थल पर क्यों नहीं पहुंचे। उन्होंने इसे अदालत और न्यायपालिका के लिए चुनौतीपूर्ण घटना बताया और कहा कि यह सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था और न्यायपालिका पर दबाव डालने जैसा मामला है।
सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार की भी आलोचना की और कहा कि राज्य प्रशासन ने इस गंभीर मामले में त्वरित कार्रवाई नहीं की। कोर्ट ने इसे प्रशासनिक लचर रवैये के रूप में देखा और कहा कि ऐसी घटनाएँ लोकतंत्र और न्यायिक स्वतंत्रता के लिए खतरा हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना से स्पष्ट होता है कि न्यायपालिका और प्रशासनिक अधिकारियों को सुरक्षा और अधिकार सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है।