कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव की जमकर आलोचना की है। पार्टी का कहना है कि यह कदम बड़े और अधिक आबादी वाले राज्यों को लाभ पहुंचाएगा और जनता का ध्यान भटकाने की एक राजनीतिक चाल है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री देशवासियों को भ्रामक जानकारी दे रहे हैं।
‘जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश’
कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर कहा कि प्रधानमंत्री पुराने पैंतरे अपना रहे हैं और भ्रामक बयान दे रहे हैं। रमेश ने लिखा कि अगर लोकसभा की ताकत 50% बढ़ाई जाती है और प्रत्येक राज्य की सीटें भी 50% बढ़ाई जाती हैं, तो दक्षिण भारतीय राज्यों को कोई नुकसान नहीं होगा, यह जनता को धोखा देने का तरीका है।
दैनिक देहात से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश और केरल के बीच सीटों का अंतर वर्तमान में 60 है, जो इस प्रस्ताव से बढ़कर 90 हो जाएगा। इसी तरह, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के बीच का अंतर 41 से बढ़कर कम से कम 61 हो जाएगा। जयराम रमेश ने कहा कि इस तरह के कई उदाहरण हैं जो प्रस्ताव की असमानता को दिखाते हैं।
बड़े राज्यों को मिलेगा लाभ, अन्य प्रभावित होंगे
कांग्रेस का कहना है कि यह प्रस्ताव बड़े और अधिक आबादी वाले राज्यों को लाभ पहुंचाएगा, जबकि दक्षिण भारत के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा और उत्तर-पूर्व के राज्यों की सापेक्ष शक्ति प्रभावित होगी। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि देश आर्थिक और विदेश नीति संकट का सामना कर रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री की प्राथमिकता केवल लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाना है, और वह भी बिना व्यापक सार्वजनिक परामर्श के।
महिला आरक्षण और संसद का विशेष सत्र
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में कहा था कि बजट सत्र को तीन दिन बढ़ाया गया है ताकि 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून 2029 से लागू किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकसभा सीटें बढ़ाने से किसी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी।
कांग्रेस ने इस कदम को चुनावी लाभ के लिए जल्दबाजी बताया। पार्टी का आरोप है कि सरकार ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ लागू होने के 30 महीने बाद इसे संसद में पेश किया, ताकि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनावों से पहले राजनीतिक लाभ लिया जा सके। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि परिसीमन में जल्दबाजी से गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
जयराम रमेश ने कहा कि यह प्रस्ताव जनता का ध्यान भटकाने का हथियार है और राजनीतिक लाभ के लिए कानूनों और संसद की प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है।