नई दिल्ली। देश में महिला आरक्षण से जुड़ा कानून लागू होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की महिलाओं की भूमिका को लेकर विशेष संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि भारत की नारी शक्ति ही एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र की असली पहचान है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेशों की श्रृंखला “सुभाषितम” में लिखा कि देश की माताएं, बहनें और बेटियां अपनी मेहनत, संकल्प और सेवा भाव के जरिए हर क्षेत्र में भारत का गौरव बढ़ा रही हैं। इस अवसर पर उन्होंने संस्कृत के दो श्लोक भी साझा किए और नारी शक्ति को सम्मान दिया।
लोकसभा और विधानसभाओं में 33% आरक्षण
महिला आरक्षण कानून के तहत लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जाएंगी। संसद ने सितंबर 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को मंजूरी दी थी, जिसे राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यह कानून 16 अप्रैल 2026 से लागू हो गया है, लेकिन इसके लाभ मिलने में अभी कुछ समय लग सकता है।
2029 से पहले लागू होना मुश्किल
कानून के प्रावधानों के अनुसार महिला आरक्षण का वास्तविक लाभ 2029 के आम चुनाव से पहले मिलना मुश्किल है। इसकी वजह यह है कि इसे 2027 की जनगणना के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है। जब तक नई जनगणना और उसके आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण नहीं होगा, तब तक वर्तमान लोकसभा में इस आरक्षण को लागू नहीं किया जा सकेगा।
संसद में चल रही चर्चा
फिलहाल संसद में इस मुद्दे से जुड़े तीन अहम विधेयकों पर चर्चा जारी है। इनमें लोकसभा की कुल सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव भी शामिल है।
प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में आश्वासन दिया कि परिसीमन के दौरान किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा। उन्होंने इसे अपनी “गारंटी” बताते हुए कहा कि यह कदम नारी शक्ति को उनका अधिकार दिलाने के लिए उठाया जा रहा है।
वहीं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी स्पष्ट किया कि दक्षिण भारत के राज्यों की सीटों में कोई कमी नहीं होगी। उन्होंने बताया कि दक्षिणी राज्यों की सीटें 129 से बढ़कर करीब 195 तक हो सकती हैं। उदाहरण के तौर पर तमिलनाडु की लोकसभा सीटें 39 से बढ़कर लगभग 59 होने की संभावना जताई गई है।