नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक विशेष मंत्रियों के समूह (GoM) का गठन किया है, जो हालात की समीक्षा और देश पर इसके संभावित प्रभावों का आकलन कर रहा है। इसी क्रम में इस समूह की एक अहम बैठक आज फिर आयोजित की जा रही है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शनिवार शाम चार बजे इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक में मुख्य रूप से पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और उसके चलते भारत की ऊर्जा, आपूर्ति और आर्थिक व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की जाएगी।

जरूरी आपूर्ति पर फोकस

बैठक में एलपीजी, पेट्रोल-डीजल, खाद (फर्टिलाइज़र) सहित आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति स्थिति की समीक्षा की जाएगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक तनाव का असर देश की सप्लाई चेन पर न पड़े और आम जनता को किसी तरह की परेशानी न हो।

पहले की बैठकों में क्या हुआ था?

इससे पहले 8 अप्रैल को रक्षा मंत्री के नेतृत्व में इस समूह की तीसरी बैठक आयोजित हुई थी, जिसमें कई वरिष्ठ मंत्री शामिल हुए थे। इनमें स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

उस बैठक में सरकार ने स्पष्ट किया था कि देश में ईंधन, रसोई गैस और खाद की निर्बाध आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए तैयारियों को और मजबूत करने पर जोर दिया गया था।

लगातार निगरानी और रणनीति

इससे पहले 2 अप्रैल को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में हुई बैठक में भी पश्चिम एशिया के हालातों पर विस्तार से चर्चा हुई थी। उस समय जोखिम कम करने और त्वरित प्रतिक्रिया रणनीति पर विचार किया गया था।

सरकार का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए 24 घंटे निगरानी और समय पर निर्णय लेना बेहद जरूरी है। केंद्र सरकार विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए देश की ऊर्जा सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और खाद्य आपूर्ति को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रही है।