नई दिल्ली: राज्यसभा में उपसभापति के पद पर एक बार फिर हरिवंश नारायण सिंह को निर्विरोध चुन लिया गया है। यह संसदीय इतिहास में एक उल्लेखनीय क्षण माना जा रहा है, क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी व्यक्ति को लगातार तीसरी बार इस पद के लिए बिना किसी मुकाबले के चुना गया हो।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सदन में उपस्थित रहे, जिससे इस प्रक्रिया का राजनीतिक और औपचारिक महत्व और अधिक बढ़ गया। आमतौर पर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिलती है, लेकिन इस बार उपसभापति के चुनाव में सहमति का माहौल नजर आया।

चुनाव प्रक्रिया में विपक्ष की ओर से कोई नामांकन दाखिल नहीं किया गया, जिसके चलते हरिवंश नारायण सिंह का चुना जाना लगभग तय माना जा रहा था। निर्धारित समय सीमा तक किसी अन्य उम्मीदवार के मैदान में न आने के कारण यह प्रक्रिया औपचारिकता मात्र रह गई।

जानकारी के अनुसार, उनके समर्थन में कुल पांच प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए थे, जिनमें जे.पी. नड्डा, निर्मला सीतारमण सहित कई वरिष्ठ नेताओं के नाम शामिल थे। विभिन्न दलों के समर्थन से उनकी उम्मीदवारी को व्यापक स्वीकृति मिली।

संसदीय नियमों के अनुसार, सदन में इन प्रस्तावों पर औपचारिक रूप से कार्रवाई की जाएगी और ध्वनि मत के माध्यम से प्रक्रिया पूरी की जाएगी। एक प्रस्ताव के स्वीकार होते ही बाकी स्वतः समाप्त हो जाते हैं, जिससे चुनाव की स्थिति केवल औपचारिक रह जाती है।

हरिवंश नारायण सिंह इससे पहले 2018 में पहली बार और 2020 में दूसरी बार इस पद पर चुने गए थे। अब तीसरी बार उनकी वापसी को उनके अनुभव और सदन में उनकी स्वीकार्यता के रूप में देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि राज्यसभा सदस्य के रूप में भी उन्होंने शुक्रवार को शपथ ली थी। उनका यह तीसरा कार्यकाल बताया जा रहा है, जो वर्ष 2032 तक चलेगा। गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रपति ने संविधान के प्रावधानों के तहत उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया है।

पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के कार्यकाल समाप्त होने के बाद उच्च सदन में एक सीट खाली हुई थी, जिसे अब इस नामांकन से भरा गया है।